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सजा ली है मौत ने अपनी बारात
सजा ली है,मौत ने निडरता से अपनी बारात बना लिया सबके श्वास को,उसने है सौगात। दे दी है मोहलत ,कुछ सबको खुशहाल जीने की, गीत गाकर रही,जीलो कुछ पल बिन्दास जिन्दगी। लेकर हाथ में श्वेत शाल,साथ वह चल रही संग हर घड़ी , तोड बंधन सारा,काटकर रख जाएगी माया की कडी। लेकर नाम राम का,बिछा…
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मेरी कश्ती
दीखती नही है कश्ती,नजर आता नही किनारा, बदल गया सब कुछ, जाने कहा गया वो नजारा! नये उत्साह से शुरू होने को था नये सिरे से सफर सहसा दर्द ने बिंधे तन से,कदम रुके लडखढाकर। रह न सकी मै खड़ी, टूटे मनसूबे सारे बिखरकर फरिश्त पूरा न हुआ, कागज पर लकीर बस रह गई जुडकर।
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Confusion
Education makes no difference Mind is though in surveillance pot is minutely holed of its sense It can’t hold long with patience ; A wonder decends leaving emptiness Courage drains smearing easiness, it is futility,surrounded strangeness Expect not, for death has no softness ! There’re minutes,hours, days of longing Working on puzzles time prolonging .…
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पूछो इनसे!
पूछो इनसे किसके स्वागत मे खिलती ये गुड़हुल की कलियां,लाल रंगीली! मीठा रस-पाक भरकर आचंल में बुला रही डाली पर परिन्दे नन्हे! देखो उनकी चतुराई हठीली पंख पसार बैठ डाल हरियाली मधु सुगंधित बनाने ले जाती हैं रस, रानी की खिदमत में फिर जाती बस! हरे चमकते पत्तों की बिछा कर चादर बुला रही मधुबन…