• कहता है मन।

    दिनांक:-१४जुलाई२०२५शीर्षक:-“कहता है मन”विधा:- कविता “कहता है मन” कहता है मन, तुम हो यहीं ,सदा मेरे पास।मज़ाक में भी , दूर जाने का ना दो आभास! गुजर गए कई साल,यह होता नहीं विश्वास।पल पल जुड़ती रहती है कुछ वज़ह खास! भूलता नहीं कभी, तुम्हारा वह परिहासमज़ाक में तुम जब रोक लेते अपनी श्वास।। बेचैनी से मैं…

  • फांसी

    अभी बहुत है माया बाकी मधुपान करा रही बन साकी बहुत दूर  झलक है उसकी लेती उसका होंठों से नाम बीत रही इसी नाटक में शाम। वहां आवाज पहुंचती नहीं मेरी भटक रही बन माया की चेरी। कर रहा वह मेरा हि इंतजार पर मैं हू उसकी इच्छा से बेजार उम्र की इस दहलीज पर,…

  • फांसी

    अभी बहुत है माया बाकी मधुपान करा रही बन साकी बहुत दूर  झलक है उसकी लेती उसका होंठों से नाम बीत रही इसी नाटक में शाम। वहां आवाज पहुंचती नहीं मेरी भटक रही बन माया की चेरी। कर रहा वह मेरा हि इंतजार पर मैं हू उसकी इच्छा से बेजार उम्र की इस दहलीज पर,…

  • On Caravan

    Traveling to places known and unknown Without wings of desire I have flown Time was difficult, the Almighty only support, In dreams too,I imagined never treading such road. Young I was, numerous duties on shoulder , Reasons escaped ,logic failed I hit a boulder. Weak were steps , will of wisdom did purport, Children’s Education…

  • कैसे दूर करूं यह बेचैनी

    रहते हो साथ सदा तुम मेरे मन भ्रमित रहता तेरे ही द्वारे। जानते मेरे भविष्य की होनी , फिर भी  सताती मुझे बेचैनी । बता ना सकूंगी अपनी अनुभूति , संशय जो मन में संचित है करती। मेरी कोशिश अथक हो जाती बेकार कठिनाई का मिलता नहीं कोई सार। तुम्हीं एक मुझको लगा सकते पार…

  • मेरा घर

    घर की चाहत ने मुझे बहुत है रिझाया , दौड़ी कई शहर पर ठौर ना एक पाया। बुनती रही सपने दिन ऐसा तो आयेगा , अपनी भी छत पर, निरंतर सुकून बरसेगा। समझ ना पाई मैं,कब कहां कर गई गलती, कहूं कैसे दे गई दगा,मेरी ही ज़िन्दगी! निभाती रही साथ जिसका,उड़ गया वह पंछी, डूबा…