• गुरू गोविंद सिंह

    “गुरू गोविंद सिंह” सिक्खों के हुये नायक ,मां भारती के गोविंंद बने वीर सुपुत्र ।यशस्वी बन गये पाकर,नौवें वर्ष ही में राज पाठ कासूत्र! पिता इनके नौवें गुरू तेग बहादुर !जिनसे स्थापित हुआ सिख धर्म!समाज की देकर जिम्मेदारी,नेतृत्व दिखाए उन्होंने सुकर्म ! यौवन के पूर्व ही बन गये गोविंद रक्षक नव भारत सीमा के!मुगलों से…

  • “रामु सिया सोभा”

    प्रकट भये त्रैलोकपति श्री विष्णु और नारायणी! आसीन हुये सबके हृदय,बने धर्मयुक्त नर-नारी! वाटिका में जानकी ने सहसा देखा रघुवर श्रीराम। मन वही रह गया जानकी का ,चरणों में मिला धाम ! स्वयंवर आये अनेक राजा और लंंकापति नृप-श्रेष्ठ। शिव धनुष “पिनाक” हिला नही,प्रयास हुआ निश्चेष्ट ! ब्रम्हा-विष्णु-महेश रचित विधान,संकट से घिरा रावण हरि हाथों…

  • आओ चलें अयोध्या

    मंच को नमन! मानसरोवर साहित्य अकादमी “आओ चलें अयोध्या नगरी” आओ चलें अयोध्या,चले सिया राम की नगरी!मन रहा रघुुवर त्योहार,”अगर” सुवासित सगरी!आओ चले अयोध्या…..हवन-कुंड सहस्त्र बने,होम करें विशवामित्र-बशिष्ट !प्रसाद सभी पायेगें हवन का “राम हलवा”अवशिष्ट !आओ चलें अयोध्या……दशक पचास ,मिला था इक्ष्वाकु-वंशको अन्याय !वीर भक्तों नें दी जान,पश्चात मिला न्यायालय न्याय!आओ चलें अयोध्या…..हाथ जोड़ हनुमान…

  • जाड़े की धूप

    “जाड़े की धूप” मिलती जाड़े कीधूप हमें,काश अपने ही बाजार में! होता इससे सबका श्रृंगार घर के सुुनहरेआंगन में! फिर सबके नयन नही, जोहते बेसब्री से उसकी बाट! कपड़े भी झट सूखते,नही लगती इतनी देर दिन सात! पर शायद!ऐसा सपना कभी नही हो सकता है पूरा! विज्ञान का,प्रकृतीरहस्य में हस्तक्षेप होगा बहुत बड़ा! आज धूप…

  • जाड़े की धूप

    मिलती जाड़े कीधूप हमें,काश शहरी बाजार में! होता इससे सबका श्रृंगार घर के सुुनहरेआंगन में! फिर सबके नयन नही, जोहते बेसब्री से उसकी बाट! कपड़े भी झट सूखते,नही लगती इतनी देर दिन सात! पर शायद!ऐसा सपना कभी नही हो सकता है पूरा! विज्ञान का,प्रकृतीरहस्य में हस्तक्षेप होगा बहुत बड़ा! आज धूप छुु़ड़वाता काम,तब होती है…

  • मातृ भाषा को नमन

    नमन मंच को। मुुखरित होते हैं जिससे,सबके मन के भाव।मां सा प्यारा रिश्ता उससे ,फैलाता जग पर अपना प्रभाव ! शब्द उसी के, आवाज उसी की,कोई नही है उससे दुलारा! जीवन के सारे अनुभवों की अभिव्यक्ति, नमन उसे है अनेक हमारा! शुभकामनायें।🙏