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  • मात्री दिवस पर-मेरे अनमोल पल!

    January 15, 2023

    वह मनाती नित त्योहार है ,अपने उस संसार कासजा उसका एक घरौंदा है, स्नेह भरा संतानों का!नाम अनेक पर वह एक ही रुप मे सगर है बसती,स्नेह दान का व्रत अखंड ,कभी नही वह हैतोडती।अविस्मरणीय होते हैं उसके कुछ आलोकित पल,आजीवन संजो रखती जैसे पुष्प,पंखुड़ियों के दल!जब भी वह पल वह पल याद आता हैसब…

  • चरैवेति चारैवेति”
    देखो,जनमानस में आई नई जागृती
    चल पड़ी हैअब ,सूनी पड़ी सड़कें भी
    अर्थहीन बनी, COVID19 छाया भी
    निर्भीक वज्र-हस्तआस की,है जगी।
    कई बार आये हैं, पहले भी विक्रांत बहाव,
    धीर-सहष्णुता ने डालने दिया न पड़ाव,
    ढीला न किया समाज ने साहसी कसाव,
    “विश्वास,बसंत आएगा”भर रहा है घाव।
    मनु -संतान भयभीत न कभी है हुई,,
    पहाड भी कदम न उसके रोक सकी ,
    है बिसात क्या,इस छुद्र जिवाणुकी ?
    खुदIयी से डरा,खौफ उड़ाता है नकली
    कष्टों को भारती नही हैं कभी गिनते,
    बना मित्र उन्हें,हौसला लेआगे ही बढ़ते!
    जीत कर उजाला हम सदा हँसते ही रहते,
    उम्मीद-धैर्य से सजा,खुशियों को हैं जगाते।
    अब सुनी गालियाँ पुनः हैं महकने लगी,
    घर घर से आ रहि गूँज हँसी की ऊंची।
    गीत सज रहे श्रमिकों के होथो पर भी
    पढ़ रहे पाठ है बच्चे, “चरैवेति चरैवेति!”
    बीती रात्रि,खोया है हमने बहुत कुछ
    रोटी रोजी काल-स्थिरता गई थी बुझ!
    अब बढ़ेंगे मिलकर ,स्मृतियो को तज!
    नया उत्साह,निर्झर निर्मल धारा सज!
    शाम सिन्हा
    1-6-’20

    January 15, 2023

  • पुनीत नींव निर्माण “
    दीप जलाओ,नगर सजाओ,शुभ घड़ी ,पुनीत है त्योहार,
    उदित सूर्य कर रहा आलोकित ,अपने राम का दरबार।
    विशवास को मिला हमारे , अखंड अनोखा वह आधार ,
    सरयू तीर, विशाल विभूति,अपने राम का हो रहा त्योहार।
    सत्य सनातन वैदिक सपना, हिन्दुत्व हुआ आज साकार ,
    एक सूत्र बंध, करें प्रणाम अपने राम को हम बारम्बार।
    असाधारण यह मंडप , प्रदीप्त दीप अखंड-आकार,
    भर उमंग चलो मिलने,अपने राम से सुरसरि के पार।
    मची धूम ,हो रही अयोध्या में , श्रद्धा की अमृत बौछार,
    शुभ सुरभित रंगीन पुष्प सजाओ अपने राम के द्वार।
    ला रहे हैं कंधे पर अनगिनत सुदूर दर्शनार्थी,भक्त कहार,
    स्थान दिखा दो,लगा जहाँ,अपने निश्चल राम का दरबार।
    उच्च स्वर में गूजं रहा है मधुर उतसव संगीत मलहार ,
    होगी सिद्ध मनोरथ सबकी,अपन राम का पाव पखार।
    विविध भोग रुचिकर चढ़ाओ, व्यंजन बना अनेक प्रकार ,
    स्वीकार करें अपने राम तो,सबका स्नेह- श्रम होवे निसार
    राह सवारू, छिड़को गंगाजल, गुंजित हो रहा ओंकार ,
    हो रही तृप्त आत्मा सबकी,अपने राम के चरण पखार।
    शमा सिन्हा
    9-8-’20

    January 15, 2023

  • “मिलन चिरंतन” यह कविता मैंने अपनी कल्पना के आधार पर लिखा है।
    महाभारत युद्ध के बाद द्वारिका के लिए प्रस्थान करते समय,रास्ते से मुड़कर, कृष्ण जरूर वृन्दावन-मथुरा गये होंगे-नंद, यशोदा, गोपीयो से मिलने। राधा मिलन का काल्पनिक चित्र ,यहाँ मैंने अभिव्यक्त किया है।
    “मिलन चिरंतन “
    व्यथित चित, टूटा द्वारिकाधीश का धैर्य धन
    स्थिर, रह सका न पल भर ,माधव का बेचैन मन,
    श्याम-घन घिरे थे, फिर भी चल दिए पथ वृन्दावन।
    राह तकते,ढूढती आँखे,उत्सुक थी किशोरी मिलन।
    जमुना तट,वट छैया देख,पूछा “क्यो हो इस हाल में ?”
    “आह, श्याम आये आज,फिर क्यो हमसे नेह जोड़ने?”
    प्रेम आतुर हो झाँका नंदन ने,लली के विव्हल नैनो में ।
    चंचल चितवन, बांह थाम,ले चलें राधा को निधि वन में।
    वह निश्चेष्ट ,सहमी हुई,बढा रही थी अपने धीर कदम।
    बैन न थे कहने को ,संजोये थे दोनों ने अथक अपनापन।
    भींग गया अंग वस्र ,व्यथित हृदय से बहा जो अश्रू धन।
    अस्त सूर्य, मध्यम प्रकाश बह रह था मधुमय प्रेम पवन,
    देख छटा, रात्री उतरी, सितारों जड़ित चुनरी पहन।
    स्नेहिल कर से ,माधव ने किया रौशन तारा एक चयन।
    लगाई उसकी बिंदी माथे तो, भींगे गये दोनों के नयन।
    रुक न सका नीर आँखों का,कटि रात्री बिना शयन।
    हाथ थाम,एक दूजे को तकते,हुआ न शब्द सम्भाषण।
    मुग्ध रात थी देख, प्रेमी युगल हृदय न अब था बेचैन,
    अद्वितीय योग ,समझ लिया दोनों ने, एक दूजे का मन।
    ऐश्वर्य आत्मग्यान का पाकर ,समृद्ध हुआ दो अन्तर्मन,
    मुक्त हुई अभिलाषा, स्थिर समभाव, अर्थ हुआ स्थापन।
    विरह- मिलन,जन्म -मृत्यु, सब पचं तत्व का है रुदन!
    संयोग चिरंतन अद्वैत हुआ, बन गये दोनों अद्वैतम!
    शमा सिन्हा
    16-10-’20

    January 15, 2023

  • हक नहीं पूछू”
    मुस्कुराते थे जब-तब बचपन में, बिना वजह हम,
    डांट खाकर भी न होती, वह हँसी जरा भी कम।
    पूछा नहीं तब, जिन्दगी से, क्या ये रहेगा यूहीं हरदम?
    लेकर तोहफा खुशी का, बड़े लापरवाह हो गये हम!
    बाकी अभी भी, ज़हन में है अनगिनत,कई एक भरम,
    अब जगह न रही कि सवाल करें उससे कोई भी हम।
    बहा रही कश्ति-किस्मत,उसी रवानगी से जा रहे हैं हम,
    हवा की दिशा भी तो, कर्मो की गठरी में बान्ध रखे हैं हम।
    शमा सिन्हा
    29.10.’20

    January 15, 2023

  • शुभ होगा मंगल -मय वर्ष 2021 सबका!”
    शुभ-सूर्य ,का आशीर्वचन,होगा शुभ वर्ष 2021सबका!
    शुभकामना प्रभारित करेगा, चहु ओर शुभता सागर का।
    शुभ रंग -रूप धारण कर यह सबका सपना पूर्ण करेगा।
    शुभ- शुभ्र होगा प्रतिबिंब, सबकी अपेक्षित आकाशंओ का ।
    शुभ- सौभाग्य से शीघ्र ही, विश्व प्रारब्ध आच्छादित होगा।
    शुभ स्वस्थ-मधुर स्वर कलरव ध्वनित, सबका घर आगंन होगा
    शुभदायक शुभाशीष लिए, मंगल मय2021फलदायक होगा।
    शुभकामना प्रभारित करेगा, चहु ओर शुभता सागर का।
    शुभ रंग -रूप आशा धारण कर यह सबका सपना पूर्ण करेगा,
    शुभ- नवरंग प्रतिबिंब होगा, सबकी अपेक्षित आकाशंओ का ।
    शुभ- स्वर्ण किरणो से शीघ्र, विश्व प्रारब्ध आच्छादित होगा।
    शुभ स्वस्थ-मधुर स्वर ध्वनित, सबका निज घर आगंन होगा।
    शुभदायक शुभाशीष लिए, मंगल मय 2021फलदायक होगा।
    शमा सिन्हा
    2-1-2021

    January 15, 2023

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