• खुशी से भेट

    प्रश्न बहुत सारे, मैं हूँ उससे करना चाहती, बस फुरसत से खुशी ,जो कुछ देर मिल जाती। आंसरा, देखती रहती हैं दो आँखे चारो पहर, पर ठहरती, वो मेरे लिए है बस एक ही पल। हौसला देती रहती,मीठे सपने है अनेक दिखाती, अभी आई नही कि अभी बेचैन हो निकल जाती। एक मैं ही नही,रास्ता…

  • हमारा मन

    अजीब है मन,नित् नया रूप बसता इसके कणकण! उमंग, हौसला ,हार-जीत,खुशी-ग़म का मिश्रण है मन। अपनी ही अटखेलियों में, उलझा रहता है इसका तन, कभी आप ही हँसता है, तो कभी रुठ जाता है,यह मन। सुबह की सुर्ख किरणे, गुदगुदा देती है मीठे से जब तन, जाने क्या सोच, शाहंशाह बन अंगड़ाई लेलेता है मन।…

  • नवनिर्माण

    संध्या हो रही थी मीता विचारों में गुथी, घिरते अंधेरों को देख रही थी। सुधीर के देहावसान को तीन साल हो गए थे। पर आज भी उसे ऐसा हिलाता ,जैसे अभी अभी की बात है। गोधूलि की वह बेला, उसे प्रतिदिन उस छन की याद ताजा कर देती ।ऐसा होना स्वाभाविक भी था। चालीस साल…

  • THE ETERNITY OF TIME

    Time keeps ticking ever the same, One by one tricky moments in game It flies fast if goodness is in space, And stops walking in gloomy glaze! Count not those ticks,while you wait, They shift not swift as letters on slate; Remain sedantry, mourning on gate; alike leftovers on an unwashed plate! Happier ones live,…

  • Time

    Time keeps ticking ever the same, One by one all moments braze, It flies fast with goodness in space, And stops walking in gloomy glaze! Count those ticks,while you wait, They shift not easy,as letters on slate; Remain a letterbox hung on one’s gate; Stinking impatience as an unwashed plate. Happier ones flip as bubbles…

  • “क्या होगा सोच कर”

    सोचती थी ,कभी जब सब स्थिर होगा फुरसत के छन में बैठूंगी,बाते करूंगी। मन को राहत मिलेगी,शब्दो को आयाम, समय को गिनना भूल ,दोनो करेंगें आराम। इंतेज़ार में वो लम्हे अनगिनत निकल गए, उम्मीद में, साथ वो भी पल छिन गिनते रहे, बेसब्र मोहलते, रहे हम इर्द गिर्द तलाशते, नई दिशा, नए ख़्वाब रहे हम…