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मुखौटा
बनाई थी उसने हमारी तस्वीर एक प्यारी जाने कितने रंग इसपर चढ़ गये मनमानी! कुछ जमाने की जरूरत ने जरूरी समझी कई संग लाई प्रतियोगितात्मकता की कूची ! अपने को सर्वोत्तम सिद्ध करने की दौड़, उड़ा ले गई वह मां के हाथ का चिड़िया कौर रंगीन श्रृंंगार का तह बन चेहरे पर छाई! कोमल मुस्कान एक तह…
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मनमानी नियती की
कौन कहता है नियमित होतीहै नियती! वह मतवाली मनमानी कुछ भी कर बैठती! दौड़ने में साथ उसके मानव भटकता ही रहता वह मेहनतकश कमाता,कभी सहेजा करता ! झांक गिरेबान अपना जब भी आप देखेंंगे, हरबार खुद को चौराहे पर खड़ा पायेंगे! देख कर सबको वह बेवफाई से है हंसती , परिस्थिति देती उलझनें पर नही सुलझाती…
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तेरी हर बात अच्छी लगती है!
नविका,हमारे घर की तू ही जान है ! हमारे जीवन का उल्लासित श्वास है! तुझसे ही बनी हर खुशी की आस है! तेरी बातों में हरश्रृंगार सी बास है! तेरे हर कदम में गूंंजता सुरीला घुँघरू ! चाहता मन बस हर पल तुझे ही दुलारू ! देने को आशीष तुझे सदा मन है पुकारा! तूने…
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शिव
निर्विकार चिरंतन सत्य हो तुम ही! निराकार रुप का आकार तुम ही! जन्म मृत्यु परे शक्ति पुंज विराम हो! तुम्ही चेतना,अवकाश तुम ही हो! आरम्भ विहीन तुम अनन्त धाम हो! सती कैलाश रमें, कैसे सम्बन्ध विहीन हो? ओंकार स्वरूप, हो आधार सनातन ! सृष्टिकाल से भी तुम हो पुरातन ! दयावान तुम बने, जीव हृदय विराजते…
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“उम्मीदों का दिया”
उम्मीद का दिया जला कर है रखा बहते नीर को कभी नही है रोका यह नही कह कभी सकती मैं, आस सदा के लिए थी दफ़्न हुई ! हां इच्छा को दबाने की कोशिश से मिजाज रूखा सा जरूर हुआ था! चांद बिखेेरता था अपनी रौशनी ! सितारे भी थे तब संंग टिमटिमाते! चांदनी शर्म…
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यादों के झरोखे से
कई एक चित्र सामने आ जाते हैं। जब जब झरोखों को खोलते हैं! तब कन्या जन्म ना था शकुन , पर रखा उन्होने बना प्रेम-प्रसून ! जन्म पर दिया डाक्टर को कंगण, त्योहार सा बना दिया वातावरण ! मैं गुड़िया छोटी सी ,फ्राक पहने , धारीदार स्वेटर, कलाई पर गहने! पापा बनाते मेरे लिए अनेक…