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“गिले शिकवे”
मेरा छूट गया लम्बा उससे था साथ,जुड़ा था जीवन पल पल जिसके पात,छुड़ा कर चला गया अचानक वह हाथ,लेकर संग, गिले शिकवे की सौगात ! होती थी शिकायत जब कोई था सुनता,मेरे मन की आहट को वह पल पल पढता,आंचल मे चाहतों की खुशियां था भरता,हर पल इर्द-गिर्द था साया उसका रहता! दूरी उनसे बन…
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मिलने से डरता हूं
दिन अनेक बीत गये मेरे वादे को रहा नही कोई कहाना कहने को ना है हिम्मत ही सच्चाई बंया करने को टूूट ना जाये शीशा,थमाया जो हांथों को। दू क्या साक्ष्य सच्चाई बताने को, उनके पास है वजह मुझसे रूठने को वो आये होसले से मिलने मुझसे मिलने को, पुरानी याद नहीं काफी सुलझाने को!…
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“मिलने से डरता हूं!”
कई दिन बीत गए निभाया नही वादे को,रहा नही कोई बहाना अब उनसे कहने को,उनके जुनून के आगे हिम्मत नही बयां करने को,डर है टूटे ना शीशा,थमाया उन्होने जो मुझको! दूं क्या साक्ष्य उन्हे सच्चाई समझाने को?पास है उनके वजह अनेक,मुझसे रुठने को,वो आये थे बहुत हौसले से ,मुझसे मिलने को,यादों का वास्ता है नही…
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“मोक्ष और मुक्ति”
ना चाहिए मुझे तुमसे अब ,मोक्ष !और ना चाहिए तुमसे कोई मुक्ति!देना ही है तुम्हे तो दे दो ऐसी भक्ति,अपने चरणों की कृष्ण तुम आसक्ति! किसी और को अब नही है पाना,सारी चेतना तुम में समाहृत जाना!बिनती एक,जब भी बुुलाऊआना,तुमसे ना है मुझे कुछ और मांगना! हर उपलब्धी है तुम में ही समाई,गवांयां है मैने…
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“श्रावणी रास “
रास रचाने गोपी संग,आकाश विशाल पर छाये! सुन कर रुक गई हवा, कृष्ण जो अपनी बंसी बजाये, श्यामल रंग भर गई फिजा,पुनः वृंदावन रास रचाये! हर एक घटा संग नाचे माधव,सबका मन भरमाये, धन्य हुईं सब बालायें,केशव जब लगे उन्हें नचाने ! लगी बरसने मधु-चांदनी, नव धारा अमृत की बहने, खिली पुष्प कलियां सतरंगी, रात…
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अहंकार
अहंकार आत्म हनन कर उगता चित्त में जो विचार ,पंच तत्व काया समझता मानव जीवन-सार,विस्मृृत चेतना कर जब जीवन उलझता माया जाल,बन्धन से तब बांध लेता अहंकार का काल! शमा सिन्हा30 -6 -23