मन के सद्भावों पर आरूढ़ ,करता बल संचार ,
असमंजस में असमर्थ की करता है यह बेंड़ा पार!
मात-पिता- गुरू- देव से अविरल होता यह संचार
शिरोधार्य कर लेता जो शीश , वह जाता वैकुंठ पार!
फल फूल रहा वह मानव,यह धन जिसके पास है
निर्धन बन जाता बली,जिसके कर्मो में इसका वास है!
लक्षमन चले भूल इसे जब,शक्ति बाण से हुये घायल
वरण कर राम नाम शक्तिबाण, इन्द्रजीत को किया कायल!
सीमा पर जाता सैनिक प्रथम रखता शीश पूज्य सम्मुख
सफल राष्ट्रसेेवक वह बनता,अर्जुन सा लक्षयोनमुख !
जीवन का हो कोई अवसर, पर्व सदा इसका ही मनता,
सुख सौभाग्य का बीजारोपण, सौगात आशीर्वाद होता!
(स्वरचित कविता)
शमा सिन्हा
रांची
ताज 12-12-23