धैर्य और भाग्य परिवर्तन
इंटर पास करने के बाद ही जब उसकी शादी हो गई और बी ए. का कोर्स अधूरा रह गया तो उसके उमंग से भरे जीवन में जैसे एक लकीर सी खिंच गई। उम्मीद उसने बहुत की थी कि वह आगे बढ़ेगी डॉक्टर बनेगी किंतु समय के साथ सारे सपने अपनी जगह वैसे ही अधूरे रह गए। वह ससुराल चली आई।बी.ए का कोर्स क्योंकि पहले साल का हो चुका था अतः उसने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की । सास ससुर ने मना कर दिया ।पति ने भी उसे इसी शर्त पर शादी की थी कि वह कामकाजी लड़कियों की तरह घर से बाहर न निकलेगी। बात वहीं रह गई। धीरे-धीरे बी. ए. का इम्तिहान सामने आ गया और उसके घर भी यह समाचार पहुंच गया कि बी.ए. फाइनल का इम्तिहान फलां तारीख से शुरू हो रहा है ।उसके डिपार्टमेंट की शिक्षिका ने उसे अनुरोध किया कि वह अपने सास ससुर को मानाये और बी. ए. का इम्तिहान दे ले। उसके बाद चाहे उसकी जैसी इच्छा हो वह करें ।उसने अपनी मां से कहा क्यों कि घर में किसी से कहने की हिम्मत न थी। वह जानती थी कि पति इस बात से नाराज होंगे और सास ससुर तो कभी उसको इसकी इजाजत ना देंगे ।मां ने उसके पापा से कहा ।पिता ने ससुर से उसकी बात कही ।जब इतने दिन तक सुधा ने क्लास किया है, फीस भरी गई है तो इम्तिहान दे देना चाहिए। बहुत मनाने के बाद,उसने इम्तिहान दे दिया और अच्छे नंबरों से वह पास भी हो गई। लेकिन उसकी शिक्षा वहीं रुक गई ।गोद में नन्हा बिट्टू आ गया और वह उसके साथ अपने जीवन को बिल्कुल उसके साथ जोड़ ली।
बिट्टू चलने लगा । फिर वह स्कूल में भी चला गया। घर की जिम्मेदारियों के साथ सुधा अपने सभी काम एक साथ संभाल लेती थी ।उसे कभी किसी ने शिकायत करते नही सुना ।बच्चे की पढ़ाई हो या घर में सास ससुर की सेवा या पति का साथ देना होता है वह सब करती।
अचानक एक दिन पति जब घर आए तो उन्होंने अपनी एक मित्र के विवाह की खबर दी ।सुधा बहुत खुश हुई कि चलो एक मौका मिलेगा जब वह किसी और से भी बात कर सकेगी ।अपने ही स्तर पर वह दूसरों से भी अपनी बात कर सकेगी ।विजय उसके पति के बहुत ही अंतरंग मित्र थे।विजय अपने पत्नी को साथ में लेकर के उससे मिलने आए। विजय की पत्नी वीणा बहुत ही सरल स्वभाव की थी । जल्दी ही सुधा और वीणा की बहुत अच्छी बनने लगी ।अक्सर दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताती । कभी-कभी तो विजय और सुधा के पति राम साथ साथ पिकनिक के लिए जाया करते थे। इस तरह से जीवन चलने लगा।
एक बार सुधा ने ऐसा महसूस किया कि उसके पति राम कुछ परेशान से रहते हैं। उनके मन में कुछ बात है जो वे सुधा के सामने आकर कहना चाह कर भी नहीं कहते ।
मौका पाकर सुधा ने राम से पूछा आप बहुत परेशान लगते हैं खासकर इधर जब से विजय की शादी हुई है और उसकी पत्नी वीणा हमारे यहां आने लगी है ऐसा लगता है जैसे आपको कुछ खलता है । इतना सुनना था कि राम ने सुधा के आगे अपना मन खोल कर रख दिया,” सुधा तुम्हें हमने पढ़ने नहीं दिया ,यह बहुत बड़ी गलती की हमने ।देखो ,आज विजय की पत्नी एम .ए . पास है ।उसको बहुत सारे नौकरी का ऑफर भी आते हैं। विजय बड़े शान से मुझे सुनाता है ।मेरी पत्नी भी तो उतनी ही काबिल हो सकती थी जितना कि उसकी पत्नी है। कम से कम इस लायक तो जरूर थी कि एम. ए. पास कर ली होती किंतु मैंने ही तुम्हें रोका। तुम्हारे सपनों को तोड़ा ।अगर तुम चाहो तो अभी भी मैं तुम्हारा इम्तहश एडमिशन करा सकता हूं ।तुम एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर सकती हो !”
इतना सुनना था की सुधा के मन में दबी हुई वह उमंग की लहर पुनः जागृत हो गई किंतु उसने अपने मन को दबाया और धीमें स्वर में कहा, “आपकी जैसी इच्छा होगी मैं करूंगी ।घर का तो सब काम में कर ही लेती हूं ।बीच में समय निकल सकता है और मेरा ऐसा क्लास हो सकता है जो कि मैं यहां से कर सकूं तो मैं जरूर कर लूंगी आप निश्चिंत रहिए “।
अखबार में इश्तिहार देखकर राम ने एक दिन सुधा का प्रवेश एम .ए .के कोर्स में करा दिया ।उसने जब प्रवेश सूचि देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि जिस विषय में सुधा ने बी.ए.पास किया था उस विषय में सबसे अव्वल नंबर पर सुधा ही थी। सुधा के सब मार्कशीट को लेकर के जब राम ने प्रवेश के लिए दरख्वास्त दिया तो उसका प्रवेश पहली बार में हो गया। बड़ी खुशी से उसने इस खबर को अपने माता-पिता के आगे रखा और बताया कि सुधा का एडमिशन किस तरह से डिपार्टमेंट में सबसे अव्वल नंबर पर हुआ है किंतु माता-पिता की खुशी वैसी न थी जैसा राम ने सोचा था उसका मन उदास हो गया लेकिन उसने सोचा कि समय के साथ मुझे भी तो आगे बढ़ना होगा ।अगर सब स्त्रियां इस तरह से आगे पढ़ लिख रही है तो मेरी भी पत्नी को आगे पढ़ना होगा ।आखिर मेरे पुत्र को भी तो वही शिक्षा दे रही है मेरा पुत्र भी तो उसी से आदर्श लेगा और उसी के अनुकूल बनेगा धीरे-धीरे समय बिता सुधा अपने बच्चे को संभालती, स्कूल ले जाती ,उसको पढाती, घर के सब कामकाज करती है ।
मा एम. ए .का इम्तिहान हुआ और वहां भी उसने बहुत अच्छे नंबर से पास किया ।एक दिन राम का स्थान परिवर्तन का समाचार आया और माता-पिता उदास हो गए ।सभी प्रश्र परिस्थिति स्थिति का सामना करते हुए राम और सुधा अपने पुत्र को लेकर स्थान परिवर्तन के नए जगह पर चले गए वहां सारी व्यवस्था करने के बाद राम ने बिट्टू के एडमिशन के लिए प्रयास किया ।कॉन्वेंट स्कूल था ।किंतु वहां आसानी से एडमिशन नहीं होता था। 18 सुधा बिट्टू और राम तीनों ही स्कूल में परीक्षा पर प्रवेश पाने के लिए वहां के प्रिंसिपल से मिलने गए प्रिंसिपल ने बिट्टू से बहुत सारे प्रश्न किए बिट्टू बड़ी ही सरलता और बड़ी निपुणता के साथ सारे प्रश्नों का जवाब दिया प्रिंसिपल साहब बहुत ही प्रभावित थे उन्होंने पूछा इसके शिक्षा कौन देता है राम ने बताया कि इसमें उसकी पत्नी का सारा श्रेय है ।उन्होंने सुधा से पूछा” क्या आप मेरे स्कूल में पढ़ायेंगी?” सुधा राम का मुंह देखने लगी। सब बातें हो गई तो राम ने पूछा क्या हमारे बिट्टू का यहां एडमिशन हो सकेगा सर प्रिंसिपल ने कहा पहले आप सोच कर बताइए कि आपकी पत्नी हमारे स्कूल स्कूल में पढ़ायेंगी की नहीं?” समय लेकर दोनों पति-पत्नी वापस आ गए सप्ताह दिन बीत गया किंतु राम ने कोई जवाब ना दिया सुधा को ऐसी उम्मीद भी न थी कि राम उसकी नौकरी के लिए राजी होंगे जब बिट्टू का एडमिशन और कहीं ना हुआ और वह बहुत भाग दौड़कर थक गए तब राम ने एक दिन कहा,”सुधा ,तुम वहां की नौकरी ले लो। कम से कम एक अच्छे स्कूल में हमारा बेटा पड़ेगा ।लेकिन क्या तुम घर को संभाल सकोगी?”
सुधा ने कहा “जब आपके घर में माता-पिता की सेवा और सारा खाना पीना बनाकर के मैंने एम . ए. किया तो क्या मैं यह अपने बच्चे के लिए ना कर सकूंगी आप आश्वस्त रहें मैं जिम्मेदारी उठाऊंगी कम से कम जब तक बिट्टू पढ़ नहीं लेता ।”
समय बिता और बिट्टू कक्षा किंडरगार्डन से लेकर के बारहवीं तक की पूरी करके और एक इंजीनियरिंग कॉलेज में चला गया अचानक राम का भी तबादला एक दूसरे शहर में हो गया वहां पर एक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय था सुधा अपनी सारी जिम्मेदारी निभा करके घर में ही बैठी रहती थी। एक दिन उसने अपने पति से पूछा “क्या मैं यहां बगल के कॉलेज में अपना अपना दवा रख दूं उसके पति ने उसका चेहरा देखा और कहा हां दिन भर तो तुम खाली बैठी हो चाहे तो तुम ऐसा कर सकती हो और देखते देखते सुधार वहां की प्रोफेसर बन गई आज सुधा राम और बिट्टू तीनों ही सक्षम है और बहुत खुश हैं उनके जीवन में शांति है समर्थ है और सुगमता है परिवार में भी सास ससुर बड़े गर्व से कहते हैं कि मेरी बहू एक पढ़ी-लिखी स्त्री है और वह कॉलेज में प्रोफेसर है” सुधा का सारा सपना पूरा हो गया था और बड़ी निश्चित थी कि उसके सास ससुर भी उसे सराहते हैं।