खुश रहने की आदत बना लो।
सब कुछ ईश समर्पित कर दो।
जो कुछ मिले सहज स्वीकारो।
समस्त परिस्थिति परिहार करो।
है नहीं अपने बस में कुछ भी।
कर्तव्य में रहो गतिशील सदा ही।
निर्विकार हो चुनो राह सभी ।
उपजेगी सरिता मनप्रीत तभी
त्याग अपेक्षा दाता बन जाओ।
करने को कृतार्थ सदा हाथ उठाओ ।
मन में चिर स्थिरता उपजाओ।
सत्व गुणों को तुम अपनाओ।
तुम इंद्रिय विषयों से व्याकुल न हो।
नाश रहित अप्रमय नित्य स्वरूप हो।
इस तत्वज्ञान को अगर पा जाओ।
स्वयं नित्यानंद मनप्रीत बन जाओ
स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।