“याद तुम्हारी “

          "याद तुम्हारी "

आयेगी जब याद तुम्हारी पुनः इस बार ।
दोहराने फिर साथ बिताए पलों का सार।।

मनाही है मेरी उनको ,रुलायें ना जार जार।
करने दें चैन से मुझे इस जीवन नैया को पार ।।

है ग़र पास कोई याद मीठी, होने दो स्वर गुंजार।
वर्ना रहे दूर मुझसे,बार बार करें ना कांटों का वार।।

पिछली बार जब वह आई थी,भिंगा गई थी पलकें।
हो गया था बोझिल मन मेरा अति, रह बीच सबके।।

अबकी जब आओ,संग उन्हीं पलों को बस लाओ।
भर कर गीत खुशी के,मेरे मन सरल को बहलाओ।।

स्वरचित एवं मौलिक।

शमा सिन्हा
रांची।