“युद्ध और शांति “

नमन मंच को।
हमारा मानसरोवर।
फरवरी २०२६
फरवरी माह की मासिक ई पत्रीका ।
शीर्षक: “युद्ध और शांति।”

बनाई हमारी सम्रृद्धशाली दुनिया को ऊपर बैठे ईश्वर ने।

नरभक्षी बन दौड़ रहा मनुज एक दूजे को खाने को।

नहीं किसी के पास जमीनी हक का दस्तावेज।

चाहते लूटना , सब जान के दुश्मन बने ।

अनगिनत वतन अपनी सीमाओं पर तैनात हैं।

बारुद से लैस खड़े, सब होने को अनाथ हैं ।

रुक गई होती लड़ाई वहीं, तो भी एक बात है।

यहां तो घर के अंदर भी दुश्मनों का ही साथ है।

वैश्विक शक्ति नहीं कोई जो रोक दे सबको।

मोहब्बतें अमन का पैगाम दे हम सबको।

कर दे रौशन द्वार , मिटा कर गोली का गहरा निशान ।

गूंजा करे जहां सितारों का सुरीला पैगाम।

यूक्रेन और रूस निवासी तो जूझ ही रहे हैं ।

दो वर्ष से निरंतर योद्धा सीमाओं पर भिड़ रहे हैं ।

प्रारंभ होकर 2022 से लंबा खींच रहे हैं ।

रुकने का विकल्प दोनों नजरंदाज कर रहे हैं।

अक्टूबर 2023 से हमास और इजराइल जूझे ।

सूडान और म्यांमार का संघर्ष चल रहा पहले से।

यमन में गृह युद्ध 2014 से जारी है।

हूती व्रिदोहयों ने कब्जे मेंसबको रखा है।

अनगिनत हुए घर से बेघर,लाखोंकी नौकरी गई है।

म्यांमार भिड़ रहा रोहिंग्या प्रवासी समुदाय से ।

आज ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है ।

पूरे मिडल ईस्ट में अमेरिका ने
तैनाती बढ़ा दी है।

हमारा देश भी गिरा है कई एक दुश्मनों से ।

हम सुरक्षित जीवन देते हैं , सीमा पर खड़े हमारे रक्षक ही ।

उत्तर ,पूर्व ,दक्षिण, पश्चिम से ललकारते दुश्मनों के योद्धा ही ।

सीमा पर लगा रहे गश्त, भारती माता की संतान ही।

कहो इस जीवन को हम क्या नाम दें।

ऐसे संगीन परिस्थिति को हम कितना सुरक्षित समझे।

कल के सूर्य हम किस विश्वास से स्वागत करेंगे।

कहो दोस्तों !हम आगामी किस त्योहार की शुभकामनाएं देंगें?

स्वरचित एवं मौलिक रचना।

शमा सिन्हा
रांची, झारखंड।

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