वह इश्क तो सच था

मंच को नमन

मानसरोवर साहित्य अकादमी

#तारीख: 12 मई 2026
#दैनिक प्रतियोगिता

मानसरोवर काव्य मंच

विषय-पंक्ति# वह इश्क तो सच था

#वह इश्क तो सच था#

दोनों ने ही स्वीकारा वह इश्क तो सच था।
सच था कि कभी अभिव्यक्त ना हुआ था।
दो दिलों का एहसास, आंखों ने कहा था।
स्नेह-अंक भरकर,मन को मन ने भेजा था।

उनके बीच शब्द कभी आदान-प्रदान न हुए।
चौखट से दोनों एक दूजे के पदचाप आंकते।
रुके कदम बिना कहे वह सब कुछ कह गए।
वो ख्वाहिशें जो कभी होंठ पर ना आ सके ।

नाम उसका सुनकर मन उमंगित हो जाता था।
उसके आने का इंतजार जो उसे सदा रहता था।
वह पत्र लिखकर एकांत में खुद ही पढ़ लेता था
कभी गीत बना कर, रौशनदान से सुना देता था।

कई बार मन का सब कुछ कह देना चाहता था। लेकिन शर्मोंहया के परदे में वह रुक जाता था।
रुमाल में उसकी आंखों की बूंदें समेट रखा था।
हताश होकर वह उसे अलविदा कह आया था।

लौटी मायके जब पति संसार से चला गया था।
उसे श्रृंगार विहीन पाकर वह विह्वल हुआ था।
बिन बोले मूक,एकटक वह देखता रह गया था ।
तब भी उसे स्वीकारा उसका इश्क तो सच्चा था।

स्वरचित एवं मौलिक रचना।

शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।