महिला काव्य मंच पश्चिम रांची जिला इकाई
तिथि -:13 -7 -26
दिन :सोमवार
विषय- समय
विधा -कविता "समय"
समय है सबसे बड़ा खिलाड़ी।
समक्ष इसके सब है अनाड़ी।।
सारा ज्ञान हो जाता है बेकार।
करता है जब यह अपना प्रहार।।
शनै शनै गागर मनुज है भरता।
वज्रपात कर यह सब ले लेता ।।
बने कोई कितना भी ताकतवर ।
विपरीत समय लेता है सब हर।।
था बलवान अर्जुन गांडीव-धारी।
पांच भील, मिल हुए उस पर भारी ।।
व्यर्थ हुआ ब्रह्म प्रदित “अक्षय तूणीर”।
खिलौना समय का बना वह वीर ।।
जीता था जो धनुर्धर महाभारत युद्ध।
हारा भीलों से ,जब समय हुआ क्रुद्ध ।।
किया संचित धैर्य जिसने मन,कर्म वाणी।
समय-सहचर बनता वही ज्ञानी।।
स्वरचित एवं मौलिक रचना।
शाम सिन्हा
रांची, झारखंड।
Leave a Reply