मंच को नमन। मानसरोवर साहित्य अकादमी
तारीख १ २.५.२६
विधा -कविता
विषय -मां
शीर्षक -“तुम्हारी यादें”
मां,तुम सशरीर अब मेरे पास नहीं हो ।
लेकिन जीवन के हर पहलू में रहती हो।
अपनी गूंजती बातों से याद दिलाती हो।
प्रतिदिन मेरे हर काम में साथ रहती हो।
ऐसा लगता है जैसे तुम यहीं कहीं हो।
मेरे रुंधे मन को स्पर्श -ढांढ़स देती हो।
हाथों में लेकर मेरा माथा चूमतीं हो।
जब भी मेरे वजूद पर संकट घेरता है ।
और मेरा मन परेशान,उदास होता है।
तुम्हारे नरम हाथों का स्पर्श याद आता है ।
गूंजता है”धीरज रखो सब ठीक हो जाएगा ।
कठिन वक्त आया है तो चला भी जाएगा।”
हर बात को विश्वास के आशीर्वाद में बदलना।
मेरे मन की हर छुपी बात समझ जाना ।
बिन मांगे हमारी ख्वाहिशें पूरी करना।
जादू कर, मेरे मन की बतला देना।
समय बीत गया और मेरी गुड़िया छूट गई ।
लेकिन तुम्हारी ममता के साथ मैं गुड़िया बनीं रही।
सीखा तुम्हारी दी हुई प्यार -सम्मान की सीख कीमती।
रिश्ते की अहमियत, पारिवारिक एकता को कैसे थी बांधती।
तुम नहीं पर साकार है वो सारा समय, साथ गुजरा।
संजोया है हमने आने वाली पीढ़ी लिए धरोहर सारा।
स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची झारखण्ड।
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