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  • शूरवीरों को नमन!

    July 18, 2024

    शक्ति स्तम्भ को देखना है जिन्हें,सशरीर चलते हुए, तो आकर,हमारे भारत की सीमा पर आपको देखले! वीर- रक्त सिन्चित संताने, पग-पग सचेत ध्वजा लिये! द्रृढता से जिनकी, पर्वत भी पाठ हैं नये नित सीख रहे ।, सागर के ज्वार भाटे नई ऊचाईयों को है ,निरंतर छूते! प्रशस्त लहरा रहा तिरंगा, हो आश्वस्त इन सींह- वीरों…

  • शूरवीरों को नमन!

    July 18, 2024

    शक्ति स्तम्भ को देखना है जिन्हें,सशरीर चलते हुए, तो आकर,हमारे भारत की सीमा पर आपको देखले! वीर- रक्त सिन्चित संताने, पग-पग सचेत ध्वजा लिये! द्रृढता से जिनकी, पर्वत भी पाठ हैं नये नित सीख रहे ।, सागर के ज्वार भाटे नई ऊचाईयों को है ,निरंतर छूते! प्रशस्त लहरा रहा तिरंगा, हो आश्वस्त इन सींह- वीरों…

  • “चुनाव “

    July 18, 2024

    मौसम पूर्वानुमान भी छूट रहा है बहुत पीछे, नेता के भाषण प्रतिस्पर्धी फरीश्त बिछा रहे । रिझाने को वादा,आसमान ज़मीं पर लाने का करते, असम्भव को बातों ही बातों में पूरा कर जाते ! क्यों भूलते हैं षडयंत्रकारी!आया है अब युग राम का! असत्य हटा कर अब सर्वत्र “आयुध “हीआसीन होगा! आत्म-जागरण करेगी सरयू- मंदाकिनी-…

  • (1)

    July 18, 2024

    “प्रभु, सुन लो बिनति!”.बना दिया है अपना अंश मुझे,दिया वह सब अभिलाषित गुण,फिर क्यों नहीं सम्भव वह सब ,जो चाहता प्रति पल मन अब? सशक्त शरीर क्षीणकाय रहा बन,स्मृतिह्रास अब हो रहा क्षण क्षण,आस सुहास समेटती दुर्बलता कण,मूक दृष्टा बन, निहार रही मैं सब। रुदन से ही होता है यह कथा प्रारंभननवजीवन पर्व बनता,शिशु का…

  • मेरी काव्यांजलि

    July 14, 2024

    …………………………………………………………….. About the authorBook titleBook descriptionPrefaceAcknowledgementDedication ………………………………………………………………… कवियित्री परिचय: नाम – शमा सिन्हाजन्म – ३-६-५४स्थान – पटना, बिहार।शिक्षा – एम.ए(अर्थ-शास्त्र)           एम. ए(अंग्रेजी)           एम.एड कोमल और संवेदनशील मन की धनी,शमा सिन्हा की शाब्दिक अभिव्यक्ति बचपन से ही कविताओं के रुप में परिणत होने लगी थी ।समय के साथ भाषा की परिपक्वता ने अपना प्रभाव बनाए रखा।…

  • मुझे मिठाई बहुत पसंद है। मीठे व्यंजन की चाहत सभी को होती है। किसी किसी को बहुत ज्यादा होती है। उन मीठे व्यंजनों को पसंद करने वालो में मै भी हूँ। शायद मेरे बत्तीसो दाँत और जिव्हा ,इनके अथक प्रेम अनुयायी हैं। खाने के पहले, खाने के बाद और बीच-बीच में भी मुझे मीठा खाने की इच्छा होती है। खासकर, रसीली मिठाई अमृत सी लगती है। मैंने अमृत पान नहीं किया किन्तु सत् चित् आनंद ईश्वर है तो इसके पारण से भी मीठाई प्रेमीयो को कुछ वैसा ही सुख मिलता है ,यह मेरा अनुमान है।दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ ! “जय जय जय मधुरस संतृप्ती “

    July 14, 2024

    तासीर, उसकी होती चित-शीतल- मधुर, वह है रसीली मनभावन मिठाई,रंग जाता मन उसमें पूर्ण, हो जैसे नैसर्गिक कथा पावन कोई।छुधा- तृष्णा संतुष्टी पश्चात, वह निकट अचानक दे जाये अगर दिखाई,रसीले गुलाब जामुन, जलेबी, चन्द्रकला, उसके है सगे रिश्तेदार भाई,अनोखी मीठी अनुभूति, नयनों ने संगीत-सरगम के साथ है पिलाई ,जैसे पूर्ण चंद्र देख,मधुर राग में व्याकुल…

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