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अबकी होली न भाई!
लो होली इस बार भी है आई अनगिनत सपने यह दोहराई। क्या कहूं क्या कारण है बनाई जाने क्यों मन को यह ना भाई। । याद बचपन की अनेक उमड़ी, लेकर पिचकारी और रंग बाल्टी पैरों में हवा ने जैसे मेहंदी लगाई, मैं उस टोली से जा मिल आई। हुड़दंग मचाती टोली में खोई पकवान…
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Thanking You is not Easy
It’s not at all easy to thank You! innumerable requests in queue. Time and again more added anew Each with an emergency in view! exceptional power,reliable support! You, the only solution for me to hold More valuable than any other gold! Life ‘s experience manyfold told! There’s none on whom the soul can count In…
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I know not
Lying on bed and taking rest Is not what I would like to have Rather a path of action to brave Your grace ever abundantly pave. What’s there in your bag for me O krishna soon peep in to tell me As years do score , life fatal be I wonder what will open for…
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क्या क्या दूं आशीष?
तुम्हीं बताओ बेटी मेरी, दूं तुम्हें क्या आशीष । तुमसे है आल्हादिनी सेवित धारा की कशिश।। कृतार्थ मन मेरा,नत्मस्तक चरणों में तेरे शीश। रुकती नहीं धारा ,भाव बहते बन अश्रू रंजीत।। प्रति-पल देती मुझेको छाया, बन वीरांगना नारी। मेरे कष्टों की जैसे तुम्हे मिली,ईश्वर से जिम्मेदारी।। कभी ना आस किया था, जायी बनेगी मेरी जननीं।…
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मां, दूं मैं तुम्हारा क्या परिचय?
“अमृतांजली” के लिए –तारीख:१४.२.२५विधि: कविताविषय -मां/ममताशीर्षक-“मां,तुम ही कहो!” मां तुम्हीं कहो,दूं क्या मैं तुम्हारा परिचय? मेरी ज़िन्दगी ने लिखा तेरे नाम हर विजय ।। रहता सजा हाथों में जिसके हैं अभयदान सदा।देख मुझको चिर उद्गमित होती उसकी ममता।। जानती नहीं तू रात और दिन कभी में कोई फर्क ।छुपा है तुम्हारे आदान-प्रदान में निश्छल प्रेम…
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बीते दिन महीने साल
बीतते जाते हैं दिन महीने साल देख सूरज को, हंस कर पूछा हाल बदल गए जीव संसार के सभी पर तनिक ना बदला तेरा दिवा काल! ज्यों का त्यों तू दौड़ रहा अपने पथ पर। हो अचम्भित,तुझको देख रहा है नर। तेरा चमकना नभ पर बना उसका काल स्वामित्व पाना चाहता, तुझको समेट कर! फ़ुरसत…