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मंच को नमन
“अटूट सम्बन्ध “ जाने कैसे जुड़ जाते हैं दो मीत।बनते सहगामी,लेकरअक्षय रीत।। इस जीवन के भी वो पार निभाते। रंजिशों को अपनी छोड़ हंसते गाते।। कसमों के बंधन में दोनो बंध कर। लोकलाज में रहते साथी बन कर।। गृहस्थी की गाड़ी चलाते मिल कर। रक्षित होता धर्म मर्यादा में रहकर।। कई बार ऐसा भी…
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“याद तुम्हारी “
“याद तुम्हारी ” आयेगी जब याद तुम्हारी पुनः इस बार ।दोहराने फिर साथ बिताए पलों का सार।। मनाही है मेरी उनको ,रुलायें ना जार जार।करने दें चैन से मुझे इस जीवन नैया को पार ।। है ग़र पास कोई याद मीठी, होने दो स्वर गुंजार।वर्ना रहे दूर मुझसे,बार बार करें ना कांटों का वार।।…
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वर्षा
“वर्षा ” ऐ वर्षा रानी,हम सब हैं रसिक तुम्हारेढंडक तेरी ऐसा लुभाती,सब होते दिवाने!बादल संग उतरती तुम जब सबको नहलाने ,बीच बीच में परिंदे भी लगते हैं चहचहाने!चोंच मार कर तोता आता,पके आम को खाने,देख मेंढक को कूद लगाते, झिंगुर लगते गाने!बड़े बेबाकी से पानी के गड्ढोंपर युवक गाड़ी चलाते,किनारे के पथिक दौड़ते अपने कपड़े…
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चरित्रवान
रखें जो सम्मान मानवता का, रक्षक जीवों का एक समान सा! वर्ण-भेद छोड़ रक्षक है सबका, उमंगित हो विशाल सागर सा! हो सम्पूर्णता करुणा बूंदों का, विशाल सोच हो नभ नील का! रथी बना जो कर्तव्य रथ का, प्रहरी वह आचार-संहिता का! निर्मलजीत सहज विजयी सा, पथ प्रदर्शन करे सहजता का! वीर-पथिक वह सजीव राम…
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कुछ बातें ना कहूं तो अच्छा
चेहरे के भाव कह जाते हैं वह सब छुपा लेते हैं जिसे चतुर शब्दों से लब! जताई थी शायद उसने मुझसे सहानुभूति, चेहरे ने कर दी कुछ और अभिव्यक्ति! भारी था सिर मेरा,तप रहा था शरीर, पर समझी, उसके आंखों के इशारे गम्भीर! “आप अड़ कर उधर बैठ क्यों नहीं जाती? सारा समय लेटे रहना…
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हे नारी !
बन गई जो तुम दुर्वा जैसी, पैरों तले दबा दी जाओगी! कोमल लता जो अगर हुई , श्वास तुम्हारी सहारा खोजोगी! अगर झाड़ की एक डाल बनी, आड़ी तिरछी ही बढ़ पाओगी! अगर तुम वट वृक्ष विशाल बनी, सशक्त हो, सबकी पूज्य बनोगी! करो अपनी आत्म चेतना जागृत, पान करो बस स्वंय शक्ति अमृत! सिद्धी…