• Vote, OUR POWER

    My introspecting mind does often earnestly plead, Why not speculate the repercussion of our careless deed! Why only accounting profits that keep to their feet? Concentrating around self-centeredness do we beat, Why do we forget gigantic loss that from nation fleet? “What of one vote”, an unwise wastage of power seat? Petty faults of patriot’s…

  • माँ – तुम मेरे साथ हो

    ऐ नारी, तुझमे ऐसी कौन सी नई वह बात विलक्षण है,हर बार, पल पल, प्रतिछन तू बन जाती कुछ खास है??बिजली कड़के बादल बरसे, पृथ्वी डोले, तू अडिग हैघोर अंधेरा छाये, तू धातृ स्थिर-स्तंभ हिम्मते-आस है! स्नेह-अंक में भर, नौ मास, संरक्षित-पोषित नायाब किया,तन मन सब मेरा अपनाकर,अटूट बंधन ही बांध लिया!कटी नाल, हम रो…

  • उसने फिर टोका मुझको!

    “अरे तुम यहाँ खड़े, किस को तक रहे हो?”चौक गई मैं देख, सड़क किनारे हंसते उसकोआसमां मे सूर्य चढा था, लेकर अपनी गर्मी कोनीचे नीलाम्बर समेटे, देख रहा था वह मुझको। “मैं तो तुमक़ो भाता था,क्यों भूल गई हमको?टूटी दिवाल के कोने से, उखाड़ लाई प्रातः को।दर्द हुआ बहुत फिर भी घर बनाया था गमले…

  • तुम ही कहो,कौन सी बात कहें?

    तुम्ही कहो, वो कौन सी बात कहें हम,सुनकर जिसे, और भी जिक्र करो तुम।हवा मधुर मधुमास, होठ भी मुसकराते रहें,हाथों मे हाथ लिए, बस साथ चलते रहे हम। तुम्ही कहो किन लफ्जों को कैसे चुनें हम,मैं दिल की सुनु या सिर्फ मन की सुनो तुम।या दोनो मिल कर, एक ऐसा फैसला करें,इक-दूजे की हर बात…

  • तू नही सर्वश्रेष्ट, ऐ मानव!

    ग़जब का संस्कार, ये धरा के फूल रखते हैं!मस्त मौजें-नशा की डुबकी लगाते रहते हैं!खबर खुद की न होश, हाले-हवा की लेते हैं!जब चाहा, बाहें पसार पंखुडिया बिखेरते हैं! सुख का दुःख का, इनको कभी शिकायत नहीं,बसंत या ग्रीश्म की बेमुरव्वत बेरुखी हवा भी,जज्बात रहते, मधुर, नित स्थिर, श्रावणी से हीअल्हड़ से मुस्कुराते मिल जाते…

  • कलियों का निमंत्रण

    कह रहीं रंग भरी ये उत्साहित कलियाँ, अधखिलीजाओ न अब तुम दूर, खिलने को हम व्याकुल अति।आये हैं बरसाने को भर आचंल, नौ रस तेरी बगिया सारीयाद करो वह भी दिन थे, जूझ रही थी, सूखी, नीरस डाली। फूलों का खिलना, सपना लेकर जीता था वह माली।किसलय को ही पाकर, रोमांच भर लेता था अपनी…