• “युद्ध और शांति “

    नमन मंच को।हमारा मानसरोवर।फरवरी २०२६फरवरी माह की मासिक ई पत्रीका ।शीर्षक: “युद्ध और शांति।” बनाई हमारी सम्रृद्धशाली दुनिया को ऊपर बैठे ईश्वर ने। नरभक्षी बन दौड़ रहा मनुज एक दूजे को खाने को। नहीं किसी के पास जमीनी हक का दस्तावेज। चाहते लूटना , सब जान के दुश्मन बने । अनगिनत वतन अपनी सीमाओं पर…

  • गीत –  ” सावन के झूले “

    गीत – “सावन के झूले” देखो सखि, अमवा तले पड़े झूले …२चलो सखी,नभ को हम उड़ कर छूलें…२ अम्मा बाबा से आस जुड़ी है हमारी,प्यारी यादों से भरी यह सुंदर सवारी!देखो सखि….चलो सखी…. रेशम के धागे में अपने सपने पिरो करसजाऊंगी सारे, मैं भैया की कलाई पर।देखो सखि…चलो सखी… पहनाकर भाभी को, चुनरी हरी बांदीनी,बनाऊंगी…

  • The Marathon

    Life is a long run marathon From one pillar to another The post reminds of power Emmassing and Acquiring. A  runner I have been  ever with  Attainment of fervor! Never has there been an end Desires trekked, reason to fend. run I know now,I need to stop Tred on road of newer crop Mind has…

  • धानी

    नमन मंच।महिला काव्य मंच पश्चिमी रांची जिला इकाई।दिनांक -२३.७.२५विषय -धानीविधा -कविता धानी बरस रहा देखो झर झर पानीपसर रहा है रंग चहुंओर धानीकह रहा मोर,देख कर मोरनी,सुन कुछ बोल मेरे,ओ सजनी! देखो, छाए घने बादल काले,बरसा रहे बूंदन के फूल प्यारे!खेतों में सज रहे धानी नजारे,आओ सखी हम कजरी गायें! कहो मेहंदी से,रंगजाये धानी!रंगे सुहागिन…

  • ज़िन्दगी की दौड़ धूप में

    मानसरोवर काव्य मंचदिनांक:-१६.७.२५शीर्षक:-“जिंदगी की दौड़ धूप में”विधा:-कविता “ज़िन्दगी की दौड़ धूप में” ज़िन्दगी की दौड़ धूप में हम यह भूल गए,कि हम ही इसके सजीव मुख्य पात्र हैं। छोड़ कर जरूरत अपने वजूद की,औरों को मात देने में हम लग गये। ज़िन्दगी जब आधे से ज्यादा बीत गई,अटपटा सा महसूस हुआ, सांझ थीआई। दौड़े थे…

  • भोलेनाथ

    मंच को नमन महिला काव्य मंच, पश्चिमी रांची जिला इकाई।विषय : भोले नाथविधा: कविता बड़े ही सरल प्रकृत है, हमारे भोलेनाथ,वादा है उनका, रहते वो सदा हमारे साथ। दरबार में उनके, उठाया जिसने है हाथ,बिन बोले सुनते हैं सबके मन की बात। जहां हो,वहीं से पुकारा है जिसने उनका नाम,बनता अगले पल ही है,सबके बिगड़े…