• प्रभात बेला

    ऐ बेला, प्रभात की !नन्हे चुलबुले शिशु की तरह। मेरी पलकों पर अपनी उंगलियों से करते हो जिरह। बरसा कर  प्रकाश अचानक पुतलियां खोलते हो । स्पर्श से अपने तुम, मेरी दुलारी निद्रा को छेड़ते हो।  ए प्रभात बेला , तुम्हारा व्यवहार अच्छा नहीं लगता। तुम हो बहुत मधुर ,  आकर्षक स्वर्ण टुकड़ा सा। अध…

  • युद्ध मानवता की हार है मानसरोवर साहित्य अकादमीविषय -युद्ध मानवता की हर हैविद्या -कवितातारीख -२३.४.२६

    परब्रह्म ने किया था जब, संकल्प विशिष्ट मानव का । स्वयं के विश्व स्वरूप को उन्होंने ,एक से अनेक साधा था।। मधुरता रंजित प्रेममय सामाज कल्पना थी उनके तप-इच्छा में। अपनी संतानों का सुगठित, पारिवारिक सपना देखा था उन्होंने। कोमल प्यार के रंग से संजो कर ,रचा उन्होंने हृदय मानव को। कर आसन ऊंचा समर्पित…

  • धैर्य धरा सी धारण करना

    मंच को नमन ।मानसरोवर साहित्यअकादमी शीर्षक -धैर्य धरा सी धारण करनाविधा-कवितातारीख :2१ -४-202६ “धैर्य साधारण करना “ तुम धैर्य धरा सी धारण करना। विचलित होकर ना तुम रहना। होगी सफलता पांव तले तेरे। पाओगे मंजिल इच्छा वाली। तुम धैर्य धरा सी धारण करना । राह पर मुस्काते हुए चलना। विकट हर कठिनाई सुलझेगी। ख्वाहिश की…

  • विश्वास ‌”विश्वास”

    विश्वास ही वह सीढ़ी है जिससे सफलता है पलती । आधारित श्रम शक्ति पर या फिर हो भाग्य की उदित विधी।। प्रथम प्रयास होता विश्वास का जो मनुष्य को हैआगे बढ़ाता।हर कदम पर ताकत लेकर वह सफलता पर चढ़ना सिखाता।। विश्वास बूटी है जीवन संजीवनी ,जो लाती पथ में उजाला। हटा अंधेरा रास्तों का, करती…

  • मान सरोवर साहित्य अकादमीनवाक्षर मासिक ई पत्रिका अंक 13अप्रैल 2026विषय: संघर्ष और श्रमविधा -कविता “संघर्ष और श्रम “

    संतुष्ट इंसान की है, बस एक ही कहानी। श्रम के रंगों से रंगी है उसकी जिंदगानी ।। कर्मों के संघर्ष से मनुष्य पाता पांच भूत काया। बनाकर घटनाओं को आधार , लिखती कहानी माया।। तोड़ कर पाषाण, होता अंकुरित बीज जैसे। श्रम करता पल्लवित सफलता को, वैसे ही संघर्ष से।। चाहता हर इंसान ,पाना सुख…

  • बदलते रिश्ते

    कभी जिस जगह से मुझे बहुत प्यार था आने का उत्साह हमेशा दिल बेकरार था जाने क्यों वक्त बीत गया कुछ ऐसे परिवर्तन हो गए अब कुछ भी यहां का अच्छा नहीं लगता घर आने का मुंह वजह आकर्षण था शायद मेरी किस्मत में हर कुछ था किंतु यहां का भोगना था कैसे कहूं क्या…