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मैंने बादलों को देखा।
सब छोटे-छोटे गुट बनाकर, अलग-अलग जाने कहां उड़ रहे थे।
किसी की सोच नहीं मिल रही थी।
उन्हें पता ही नहीं था कहां जाना है। और कब बरसना है।
मैंने पूछा उनसे” क्या सोच रहे हो?
थोड़ा हमारी और भी तो देखो!
कितनी व्याकुलता है हमारी आंखों में !
देर ना करो,अब तो आ जाओ ।”
पर किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया।
सब अपनी मस्ती में, अपनी मनमर्जी से,
अलग-अलग रास्ता लेकरउड़ जा रहे थे।
पता नहीं कब वे हमारे आंगन को महकाने आएंगे,।
और देर तक हमारे तन मन पर सावन को बरसाएंगे।
स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
१८.६.२६मैंने बादलों को देखा।सब छोटे-छोटे गुट बनाकर, अलग-अलग जाने कहां उड़ रहे थे।किसी की सोच नहीं मिल रही थी।उन्हें पता ही नहीं था कहां जाना है। और कब बरसना है।मैंने पूछा उनसे” क्या सोच रहे हो?थोड़ा हमारी और भी तो देखो!कितनी व्याकुलता है हमारी आंखों में !देर ना करो,अब तो आ जाओ ।”पर किसी ने…
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पारिवारिक एकता का पाठ
चल रहते हैं एक समय में अलग-अलग उम्र के प्राणी। किंतु फर्क होता, बहुत बदल जाती है रहन-सहन वाणी बड़े याद जब करते उनका बचपन ,भाती नहीं कहानी मिटती नहीं पुरानी गांठे, गिनते अपनी मान-हानी। अक्सर जब वह जाते रूट और लंबी होती ताना तानी। इस परेशानी से उबरने, बुजुर्ग रखते ताले में वाणी। नई…
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चलो मुस्कुराते हैं
मंच को नमन। महिला काव्य मंच पश्चिम रांची जिला इकाई।तारीख- 17. 6. 2026 शीर्षक-” चलो मुस्कुराते हैं”विधा -कविता “चलो मुस्कुराते हैं!” बस होठों को मुस्कुराने दो, रख कर आंखों को मीचे। आगे बढ़ाओ कदम, छोड़ दो जीवन की उलझन पीछे। आओ चले मुस्कुराते हुए , आज हम साथ साथ। बिन बोले ही ,मन की सारी,…
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मंच को नमन।रांची जिला इकाई नवल मंच।त्रैमासिक ई पत्रिका।तीसरा अंकअंक- जुलाई महीना, 2026विषय- श्रावणशीर्षक- “पहली बारिश”विधा -कवितातारीख -२२-५-२६ ”पहली बारिश”
देख रहे सब आस तेरा ओ बरखा रानी! प्यासी धरती कि तू ही तो है बेटी प्यारी सुहानी! मीठी सरस तेरे मुक्ता-बूंदन की, पायल सी है वाणी। बांह पसार,स्वागत है तेरा ओ! समृद्धि की वरदायनी। तू है अनोखी ,तन मन को खुशियों से है रंग देती । जेठ मास की असह्य ताप से सबको देती…
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खाने को बस अपने हैं
मंच को नमनमानसरोवर काव्य मंचतारीख:15 जून 2026शीर्षक: कहने को बस अपने हैंविधा -कविता ”कहने को बस अपनेहैं” पल भर में बदल गए सारे के सारे रिश्ते।सबसे ही मिले हों चुके थे अब कई मुद्दतें।यह रिश्ते नहीं कहने को नाम से हैं अपने।सभी बस व्यस्तता बता,आए चेहरा दिखाने।मौके के लायक था पहनावा श्वेत उन सब का।बनाकर…
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Swim not away clouds with wind
Hold not die hands oven o’cloud, o’wind! together you spill amazing mischief aloud . every eye looks up to you swimming in the sky asking questions of beckoning hopes that fly. With you o’ clouds summer’s expectations arise . to embrace falling drops of vast seas, a prize! Leaving behind lips dry and peeling for…