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रविंद्र नाथ टैगोर
मंच को नमनमानसरोवर काव्य मंचविषय :रविंद्र नाथ टैगोर शीर्षक: ” रविंद्र नाथ टैगोर”विधा- कवितातारीख: 6 मार्च 2026 “रविंद्र नाथ टैगोर” 7 मई ,1861 का दिन बना बड़ा ही महान। “विश्व कवि” के नाम से बना भारत की वह पहचान। ” गीतांजलि” में किया उसने अक्षय प्रभु का गान। गाकर “जन गण मन “गीत बढ़ाया भारत…
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पश्चाताप
मंच को नमनमहिला काव्य मंच पश्चिम रांची जिला इकाईतारीख :6 5.2026शीर्षक -पश्चाताप “पश्चाताप” कभी जब हो जाए कुछ ऐसा।जब फल ना मिले मनचाहा जैसा।लुट जाता है धरोहर का सारा पैसा।तब भाव उपजता है कुछ वैसा। मन का चैन, मन से हो जाता है दूर ।संचित हिम्मत होती है चकनाचूर ।टूट कर बिखर जाता है सारा…
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कविता समय की बहती धारा
प्रारब्ध चाहे खींच दे जटिल लकीर । रुकना ना कभी तुम ऐ मुसाफिर । हार अपनी कभी तुम मानना फिर । चल देना समय की बहती धारा चीर। यह जन्म है कई इम्तिहान का सफर । बस लक्ष्य पर रखो तुम अपनी नजर। होता नहीं स्थिर,सागर में एक पहर। ढूंढ लेती है किनारा संजोग की…
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लघु कथा “उम्मीद का अंत”
मंच को नमनमहिला काव्य मंच पश्चिम रांची जिला इकाईतारीख :4 5.2026विषय- उम्मीदशीर्षक: उम्मीद का अंतविधा -लघु कथा “उम्मीद का अंत” रुचिका को दो संताने थी ,बेटा राजेश और बेटी रुचिरा ।दोनों को उसने इंजीनियरिंग पढ़ाया किंतु दोनों संतानों में से एक थी उसके पास नहीं रहे। स्वाभाविक था दोनों ने अच्छी पढ़ाई की और अच्छी…
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तेरी गलियों में
बड़ा अपनापन सा मुझे लगता है। गुजरते हुए खामोश तेरी गलियों से। ठिठके कदम अक्सर रुक जाते हैं। तेरे घर से जब भी हम गुजरते हैं। खिड़कि पर कभी जब तुम दिखती । एक मुस्कान मेरे होठों पर है छाती । लबों पर तुम्हारे भी माधुरी सी है आती। तपिश की हवा भी ठंडक है देने लगती।…
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मौत इतना आकर्षित क्यों करती है
“मौत इतना आकर्षित क्यों करती है?” कहते हैं जग वाले ,माया ग्रसित है इंसान । अपार आनंद यह जीवन, जब तक है प्राण। इस पंच भूत काया के, गुण बहुत है महान । राम नाम का जाप कर देती दुखों से त्राण। कहो फिर जन्म रुलाती क्योंकर उसे है ऐसे ? जन्म -मरण का क्रम…