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राम आये घर
राम के आगमन को देख रहा सारा संसार! पाकर झलक लला की होंगे सब भवसागर पार! उठा नही खंजर कोई गूंजी नही कोई शंख नाद। भक्ति , विश्वास और धैर्य ने बिछा दिया विजय फूल ! सरयु तट ने किया परिभाषित, राम लला निज धाम! न्याय ने सहर्ष स्वीकारा”स्कनद-पुराण” कौशल प्रमाण! ब्रम्हा-विष्णु-रुद्रत्रीदेव को अर्पित देव-नगर”ग्रहमंजरी!”…
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शबरी के राम
मंच को नमन। मानसरोवर साहित्य अकादमिदैनिक प्रतियोगिताविषय- “शबरी के राम “विधा-कवितादिनांक- 18-1-24 शबरी के राम रघुुवर की भक्ति करती,श्रमणा बन गई शबरी!भीलकुंवर की बनी पत्नि!भील सरपंच की बेटी! साथी मन ना पहचाना,भायी नही उसे,ऐसी भक्ति! स्वीकार भीलनी ने किया नियती की थी यही मति! छोड़ शबरी को बीहड़ वन में,वह गया देने जीव बली !…
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“मुझे भी नही आता!”
बेटे बहू के घर से बहुुत हड़बड़ाहट हम में चले थे! तैयारी लौटने की विदेश से,पूरी थी पहुंचने केपहले ! किन्तु बहु की इच्छा थी कुछ विशेेष शगुन उठाने की कोई बड़ा ना था,मौका भी था और उसकी मर्जी थी! बेटे ने हवाई जहाज में यात्रा के नियम समझाये। पोते-पोती से हमने भी प्रेेम-भाव बहुत…
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गुरू गोविंद सिंह
“गुरू गोविंद सिंह” सिक्खों के हुये नायक ,मां भारती के गोविंंद बने वीर सुपुत्र ।यशस्वी बन गये पाकर,नौवें वर्ष ही में राज पाठ कासूत्र! पिता इनके नौवें गुरू तेग बहादुर !जिनसे स्थापित हुआ सिख धर्म!समाज की देकर जिम्मेदारी,नेतृत्व दिखाए उन्होंने सुकर्म ! यौवन के पूर्व ही बन गये गोविंद रक्षक नव भारत सीमा के!मुगलों से…
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“रामु सिया सोभा”
प्रकट भये त्रैलोकपति श्री विष्णु और नारायणी! आसीन हुये सबके हृदय,बने धर्मयुक्त नर-नारी! वाटिका में जानकी ने सहसा देखा रघुवर श्रीराम। मन वही रह गया जानकी का ,चरणों में मिला धाम ! स्वयंवर आये अनेक राजा और लंंकापति नृप-श्रेष्ठ। शिव धनुष “पिनाक” हिला नही,प्रयास हुआ निश्चेष्ट ! ब्रम्हा-विष्णु-महेश रचित विधान,संकट से घिरा रावण हरि हाथों…
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आओ चलें अयोध्या
मंच को नमन! मानसरोवर साहित्य अकादमी “आओ चलें अयोध्या नगरी” आओ चलें अयोध्या,चले सिया राम की नगरी!मन रहा रघुुवर त्योहार,”अगर” सुवासित सगरी!आओ चले अयोध्या…..हवन-कुंड सहस्त्र बने,होम करें विशवामित्र-बशिष्ट !प्रसाद सभी पायेगें हवन का “राम हलवा”अवशिष्ट !आओ चलें अयोध्या……दशक पचास ,मिला था इक्ष्वाकु-वंशको अन्याय !वीर भक्तों नें दी जान,पश्चात मिला न्यायालय न्याय!आओ चलें अयोध्या…..हाथ जोड़ हनुमान…