Skip to content

Ebb and Flow

An educator's life blog

  • Home
  • English Poetry
  • Hindi Poetry
  • Blog
  • Short Story
  • जाड़े की धूप

    January 12, 2024

    “जाड़े की धूप” मिलती जाड़े कीधूप हमें,काश अपने ही बाजार में! होता इससे सबका श्रृंगार घर के सुुनहरेआंगन में! फिर सबके नयन नही, जोहते बेसब्री से उसकी बाट! कपड़े भी झट सूखते,नही लगती इतनी देर दिन सात! पर शायद!ऐसा सपना कभी नही हो सकता है पूरा! विज्ञान का,प्रकृतीरहस्य में हस्तक्षेप होगा बहुत बड़ा! आज धूप…

  • जाड़े की धूप

    January 12, 2024

    मिलती जाड़े कीधूप हमें,काश शहरी बाजार में! होता इससे सबका श्रृंगार घर के सुुनहरेआंगन में! फिर सबके नयन नही, जोहते बेसब्री से उसकी बाट! कपड़े भी झट सूखते,नही लगती इतनी देर दिन सात! पर शायद!ऐसा सपना कभी नही हो सकता है पूरा! विज्ञान का,प्रकृतीरहस्य में हस्तक्षेप होगा बहुत बड़ा! आज धूप छुु़ड़वाता काम,तब होती है…

  • मातृ भाषा को नमन

    January 10, 2024

    नमन मंच को। मुुखरित होते हैं जिससे,सबके मन के भाव।मां सा प्यारा रिश्ता उससे ,फैलाता जग पर अपना प्रभाव ! शब्द उसी के, आवाज उसी की,कोई नही है उससे दुलारा! जीवन के सारे अनुभवों की अभिव्यक्ति, नमन उसे है अनेक हमारा! शुभकामनायें।🙏

  • मचल मचल कर वह बांवरी, यूं बरसने आई है ढक गया नीलनभ भी, धुंध श्याम छवि लाई है। खो गई डालियां, कलियां कोमलांगी झड गई हैं। प्रीत अनोखी, धरा-गगन की, रास रंग की छाई है। कतारों मे चल रहीं,रंगीली जुगनुओं सी गाडिय़ां । सरसराती, कभी सरकती, झुनझुनाती पैजनियां । देखो कैसी रुनकझुनक, मस्ती संग ले आई है । सब पूछ रहे रसरजिंत हो, यह क्यों ऐसे मदमायी है? नांच रहा कोई, ऐसा कौन रंग बरसाई है छुप रहा कोई-पत्तियों तले ना ये जा पाई है गा रहा कोई- यूं राग तरिंगिनी बन यह आई ह रोको न इसके कदम-ले जाने इसे आई पुरवाई है। कडकती बदली से चुरा, श्यामल चुनरी लाई है!

    January 10, 2024

  • नये घर के आंगन से

    January 10, 2024

    क्या किसी ने पुकारा? घर किसे कहते है,मैं सोचती हैैरतअंदाज सजी कोठरिया या गूंजती हसी का साज वह तिल तिल जोड़ता, नये सपने बुनता “हर ईट को मैंनें इन हाथों से है अरजा कल के कष्ट भरे पलों को कफन उढाता गर्व से उठा कर सिर वह अक्सर कहता, बनाया यह महल सबके महल से…

  • The Whistling bird

    January 10, 2024

    A sweet long shrill whistle followed me Every time I peeped out of the window to see! Surprised I was to find none there to be In search, I strayed through lanes, in hours wee. Lazy air, camly enclosed me wherever I be, I knew not opening this secret lock with key! Confused I was,…

←Previous Page Next Page→

Copyright © Ebb and Flow, 2019-2025. Unauthorized use and/or duplication of this material without express and written permission from this site’s author and owner is strictly prohibited. Excerpts and links may be used, provided that full and clear credit is given to Shama Sinha and Ebb and Flow with appropriate and specific direction to the original content.