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तमन्ना
बर्बाद करती है रौनक इसकी,जिन्दगी को नही देती चैन इसकी शख्सियत एक पल को! सुबह-शाम घड़ी से तेज चलते है इसके कदम, आप ना चाहें फिर भी रहती है साथ हरदम! इसका नशा बि
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विडम्बना
विडम्बना बांधा था मां यशोदा ने कृष्ण चंद्र लाल कोगोपियों की शिकायत. माखन की लूट को ब्रम्हांड कौ जो बांधे,रस्सी कौन बांधे उसको?विधीका विधान देखो,कुपूत ने बांध मा बाप को! आंख लाचार,पैरों से हुआ मुश्किल चलना!जतन करें कैसे,कठिन है दो वक्त का खाना! उम्मीद रही टूट ,किया शुरू अंधेरे ने घेरना!सब धन लुटाया जिनपर वही…
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सौंदर्य
“सौंदर्य” कल तड़के सुबह सवेरे,आया जब नगर निगम से पानी, स्फूर्ति से उठाकर पाईप मैं चल दी नहलाने क्यारी धानी। बोल उठी खिली बेला की कलि”देखो हुई मैं सयानी! मेरी खुशबू पाकर, तेजी से आ रही वह तितली रानी।” “अभी अभी मै खिल रही हूं,प्यास बुझा दो देकर पानी। दो क्षण पास ठहर जाओ,बातें बहुत…
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आंख चुराना
मन को भाता तेरा, गोप बालकों संग खेलना मोहन! आंख चुरा कर,मार कंकरी टूटी मटकी से लुटाना माखन ! बड़ा मनोहर लगता जब मैया लाठी ले दौड़ाती तुझको! छुप करआंचल में, कथा नई सुनाकर ठगता तू उसको! तेरा खेल बड़ा निराला,विशाल पशुधन का मालिक होकर चोरी कर खाता! देेख छवि अपनी मणी खंभें में,झट नई…
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“प्रगट हुए कौशल्या के राम “
मंच को नमनR V N महिला काव्य-मंच,झारखंडता: 8-1-24विधी- कविता “प्रगट हुए कौशल्या के राम” सहसा उपस्थित हुए ,राम भक्त शिरोमणी वीर हनुमान। उच्च स्वर शंखनाद कर जगाया सबका कुुल स्वमान ! सेवा में रहते सदा समर्पित, हृदयासीन सीताराम काज! उतरा स्वर्ग जमी जैसे,आये काक भुशुंडि और गरुड़ महाराज! लहराई लााल विजय ध्वजा ऊँची,चमका कौशलेंद्र का…
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बिडम्बना
विश्व हिंदी सृजन सागरविषय_ चित्र लेखनविधा_ कवितादिनांक_07/01/2024 विडम्बना बांधा था मां यशोदा ने कृष्ण चंद्र लाल कोगोपियों की शिकायत. माखन की लूट को ब्रम्हांड कौ जो बांधे,रस्सी कौन बांधे उसको?विधीका विधान देखो,कुपूत ने बांध मा बाप को! आंख लाचार,पैरों से हुआ मुश्किल चलना!जतन करें कैसे,कठिन है दो वक्त का खाना! उम्मीद रही टूट ,किया शुरू…