-
My story
The date of birth noted on my Matric Certificate is 3rd of June, 1954. According to it ,this year I will
-
Little things to learn
The baby was crying since the time it woke up. Whole house ranted with I cries. Alike any other modern family where only one child occupied total attention of parents, thus child too had taken the privilege of earning all attention. Both parents, grandparents, maidservants,all making best effort to calm the baby, to no avail….
-
Impractical humanity
Practices are changing, they’re so inhuman conditions so crude,struggle to live sadden None desire nearness of their dearest As situations worsen in vicinity nearest Family connections appear most hurting A fear grips mind,compulsive is distancing . Once again cases of Covid19 is on rise Meeting dear ones is a virtual apprise. Relationship earlier were tenderly…
-
थिरकती है खुशिया,तुम्हारे पैरों
खोई कहां है चिंता,बंद है पडा,दूर फिक्र का घर उडती है खुशी साथ उसके, लगा कर कोमल पर यहाँ से वहां और फिर यहां,करती रहती वह दिन भर जाने कहां से भर लाती है ,पाकेट मे यह शक्ति सागर! कूदती ही रहती है बना बना कर गाती है गीतदिन भर!
-
मूक दृष्टा बनी तथ्यों को खोजती हूं। हंसकर शीघ्र हार मान लेती हूं। उत्सुक हूं। उससे। क्षणिक संवेदना से प्राप्त नहीं हुआ हो सकता। क्या हर गली मकान से जुड़ा नहीं उसका पता? बना आणविक रचना। सूत्र नहीं ऐसा बना दे जो हृदय को प्रवीण। मति है उनकी कितनी अलग नवीन। छुद्र प्रयत्न कर। लेती है भावना हीन। पास रहकर बनाती हो क्यों इतनी दूरी? मेरी आस को कर सकते एक तुम ही पूरी। देखकर दर्द बन गए हो तुम तमाशबीन। मोड़ कर मुंह जाने किस विचार में हो लीन।
मूक दृष्टा बनी तथ्यों को खोजती हूं मैं, हस कर फिर शीघ्र हार मान लेती हूं मैं! उत्सुक हूं ,पाने को संवेदना क्षणिक, जहां बना हर व्यक्ति बस एक बनिक! क्या हर गली मकान से जुड़ा उसका पता? सूत्र नही ऐसा जो बना दे ह्रदय को प्रवीण प्रयत्नों से जुड़तें है असामयिक विचार संगीन! करते…
-
अर्णव को जन्मदिन की बधाई
Oumहमारे अर्णव को जन्मदिन की ढेरों बधाई!🥰💐🥮🌻🍡 “आनंदित रहो तुम, सर्वदा होवे वर्षा स्वास्थ्य और संतुष्टी की, उपलब्धियां तुम्हारी बने विस्तृत, आकाश के परिमाण सी! चिरंजीवी भवः!आयुष्मान भवः पुरुषार्थी भवः!यशस्वी जैसे पाट- पयोधी ! स्वमान बने सम्मान तुम्हारा,रहे अटल रघुवर कमान सी! कुल-कुलीन के तुम भविष्य रचयिता ,पाओ अनंत कृपा ईश-आशीष की, प्रेम-शान्ति-सत् ऐश्वर्य जीवन,…