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Ebb and Flow

An educator's life blog

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  • नील-मणि-अपराजिता

    February 6, 2023

    नील मणी बनकर तू आई!

  • आदतें बदल रही है”
    आदतें बहुत बदल रहीं हैं, अब मेरी
    खर्च की लकीर हो रही कुछ टेड़ी,
    पहले मन को बहुत दबा लेती थी
    अक्सर अब छूट, मैं हूँ दे देती।
    तब पाई-पाई का हिसाब थी रखती ,
    अब लंगर से निकली, नाव सी है बहती
    ज़बान की उड़ान पर पोटली है खुलती,
    दबी इच्छा को अब कर लेती है वह पूरी ।
    सफर में पहले पराठा लेकर थी चलती,
    टिफिन को छोड़ देख खोमचे अब मचलती,
    खुलती टेबल पर,कप नूडल्स हूँ ठंढाती,
    चुस्कियाँ ले लेकर ज़बान से है सुरकती!
    सोचती ,क्या इंसान ऐसे है बदल सकता?
    सिक्के गिनने वाली से ये कैसे है हो सकता?
    क्या उसे अब कल का भय नही है सताता?
    या कुछ इस पल को भी मन जीना है चाहता?
    संजोती थी तिनका तिनका वह छुपा कर,
    “साँसे गिनी होती है”, कटु सच्चाई भूलकर,
    जुदा हुआ साथी जबसे, यूँ मुँह मोड़ कर,
    उचट गया भरोसा, कल के औचित्य पर!
    अनुभव कहता,क्या पता कब क्या होगा,
    जो इस पल है कौन जाने, क्या आगे होगा?
    कल की उम्र, उसका रचयिता ही जानता होगा,
    “आज-अभी -अब”,बस इतना ही हमारा होगा!
    अनूभूति यही,उसे भी है निरंतर खंगालती,
    बदल जायेगा कब रास्ता,वह नही है जानती
    थमे मोड पर, मनमर्जी कर लेना वह है चाहती
    अचंभित हो,वह खुद को ही रहती है निहारती।
    शाम सिन्हा
    17-12-19

    January 15, 2023

  • शूरवीरों को नमन!
    शक्ति स्तम्भ को देखना है जिन्हें,सशरीर चलते हुए,
    तो आकर,हमारे भारत की सीमा पर आपको देखले!
    वीर- रक्त सिन्चित संताने, पग-पग सचेत ध्वजा लिये!
    द्रृढता से जिनकी, पर्वत भी पाठ हैं नये नित सीख रहे ।,
    सागर के ज्वार भाटे नई ऊचाईयों को है ,निरंतर छूते!
    प्रशस्त लहरा रहा तिरंगा, हो आश्वस्त इन सींह- वीरों से,
    थम जाता समीर हतप्रभ,देख पाषाण-बाजू शमशीरों के!
    फूलों की तकदीरों में भी, उभर रहे हैं रग नय तबदीली के,
    बढ रही ऊम्र उनकी,हारकर बिखरते नहीं वो अब जमीन पे!
    मातृ नमन ,सिर ऊचां कर,कह रहा हिंद सारे संसार से –
    “रक्षित द्योढी है हमारी!”,धरा-आकाश, गूंजती यही आवाज है!
    “कीर्ति और मान वही, निखरता जिससे सर्वोच्च देश हमारा है!
    राधा-सीता, कृष्ण -राम ,सबने दिया एक ही हमेंआदर्श है –
    है कर्तव्य, भारत का धर्म और धर्म ही हिंद देश कर्तव्य है !”
    जय भारत मां।
    जय हिंद के वीर।
    शमा सिन्हा
    26-01.2020

    January 15, 2023

  • मात्री दिवस पर-मेरे अनमोल पल!

    January 15, 2023

    वह मनाती नित त्योहार है ,अपने उस संसार कासजा उसका एक घरौंदा है, स्नेह भरा संतानों का!नाम अनेक पर वह एक ही रुप मे सगर है बसती,स्नेह दान का व्रत अखंड ,कभी नही वह हैतोडती।अविस्मरणीय होते हैं उसके कुछ आलोकित पल,आजीवन संजो रखती जैसे पुष्प,पंखुड़ियों के दल!जब भी वह पल वह पल याद आता हैसब…

  • चरैवेति चारैवेति”
    देखो,जनमानस में आई नई जागृती
    चल पड़ी हैअब ,सूनी पड़ी सड़कें भी
    अर्थहीन बनी, COVID19 छाया भी
    निर्भीक वज्र-हस्तआस की,है जगी।
    कई बार आये हैं, पहले भी विक्रांत बहाव,
    धीर-सहष्णुता ने डालने दिया न पड़ाव,
    ढीला न किया समाज ने साहसी कसाव,
    “विश्वास,बसंत आएगा”भर रहा है घाव।
    मनु -संतान भयभीत न कभी है हुई,,
    पहाड भी कदम न उसके रोक सकी ,
    है बिसात क्या,इस छुद्र जिवाणुकी ?
    खुदIयी से डरा,खौफ उड़ाता है नकली
    कष्टों को भारती नही हैं कभी गिनते,
    बना मित्र उन्हें,हौसला लेआगे ही बढ़ते!
    जीत कर उजाला हम सदा हँसते ही रहते,
    उम्मीद-धैर्य से सजा,खुशियों को हैं जगाते।
    अब सुनी गालियाँ पुनः हैं महकने लगी,
    घर घर से आ रहि गूँज हँसी की ऊंची।
    गीत सज रहे श्रमिकों के होथो पर भी
    पढ़ रहे पाठ है बच्चे, “चरैवेति चरैवेति!”
    बीती रात्रि,खोया है हमने बहुत कुछ
    रोटी रोजी काल-स्थिरता गई थी बुझ!
    अब बढ़ेंगे मिलकर ,स्मृतियो को तज!
    नया उत्साह,निर्झर निर्मल धारा सज!
    शाम सिन्हा
    1-6-’20

    January 15, 2023

  • पुनीत नींव निर्माण “
    दीप जलाओ,नगर सजाओ,शुभ घड़ी ,पुनीत है त्योहार,
    उदित सूर्य कर रहा आलोकित ,अपने राम का दरबार।
    विशवास को मिला हमारे , अखंड अनोखा वह आधार ,
    सरयू तीर, विशाल विभूति,अपने राम का हो रहा त्योहार।
    सत्य सनातन वैदिक सपना, हिन्दुत्व हुआ आज साकार ,
    एक सूत्र बंध, करें प्रणाम अपने राम को हम बारम्बार।
    असाधारण यह मंडप , प्रदीप्त दीप अखंड-आकार,
    भर उमंग चलो मिलने,अपने राम से सुरसरि के पार।
    मची धूम ,हो रही अयोध्या में , श्रद्धा की अमृत बौछार,
    शुभ सुरभित रंगीन पुष्प सजाओ अपने राम के द्वार।
    ला रहे हैं कंधे पर अनगिनत सुदूर दर्शनार्थी,भक्त कहार,
    स्थान दिखा दो,लगा जहाँ,अपने निश्चल राम का दरबार।
    उच्च स्वर में गूजं रहा है मधुर उतसव संगीत मलहार ,
    होगी सिद्ध मनोरथ सबकी,अपन राम का पाव पखार।
    विविध भोग रुचिकर चढ़ाओ, व्यंजन बना अनेक प्रकार ,
    स्वीकार करें अपने राम तो,सबका स्नेह- श्रम होवे निसार
    राह सवारू, छिड़को गंगाजल, गुंजित हो रहा ओंकार ,
    हो रही तृप्त आत्मा सबकी,अपने राम के चरण पखार।
    शमा सिन्हा
    9-8-’20

    January 15, 2023

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