• आदते बदल रहीं हैं!

    आदतें अब बहुत बदल रहीं हैं, उसकी खर्च की लकीर अब हो रही जैसे टेड़ी, पहले मन को वह बहुत संभाल थी लेती धैर्य क्या छूट।, सब स्वतंत्र बहा है देती। तब पाई-पाई, हिसाब का खाता थी रखती , अब लंगर से निकली, भवर में नांव उलझती , ज़बान की चटपटी उड़ान पर पोटली खुलती…

  • कभी नहीं पूछा

    पूछा नह ,कभी धरा से कैसे सहती हमारा वार लालच मे तुम्हेबींधता यह जग, यह निष्ठुर संसार। ह्रदय चीर तुम्हारा, लूटते तुम्हारे गौरव का संसार, फिर तन कर गर्व से कहते देखो दिया है,धन अपार! मूक बनी तुम देखा करती जरा न उलटती,ह्रदय का भार, बदले मे मेरा तनमन पालती अंजुली मे लेकर,भाव उदार। बार…

  • कद ना नापो

    “कद ना नापो” श्यामल मेघआच्छादित फुहारों तले,टिप टिप बूंन्दो से बिंधती ,कोपलेंमिढ्ढी में धसी दूब ने सहसा पुकारा,“कभी मुझसे भी हाथ मिलाया करो,माना, तुम्हारा कद है ऊंचा बहुत, परइन लंबे दरख्तों को शर्मसार न करो ।ये भी,झाडिय़ों के बीच से निकल करहंसते हुये लताओं के साथ बढतीं हैं।तुम इंसा, भूलकर सत्य ,मुझपर चलते हो।मन को…

  • जीवन मेरे मन सेअगर चलता

    बात ही कुछ और होती