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जय जय देवी खिचडी रानी!
जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय जय त्रिभुवन देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की! अकाट्य महिमा इनकी,धरा-नभ-विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं सीधी सादी, आग तपाआलू-बैंगन-भरता,चमकाआखें,हैंपरोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी ,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती, अचार ,दही,तिलौरी …अरे छोड़…
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जय जय देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की!
ओम जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय देवी खिचडी अन्नपूर्णा की! इनकी अकाट्य महिमा है विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं बड़ी सादी, भाप तापती,बैंगन-भरता,चमका कर आखें,हैं परोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी भी,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती,…
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खोज रहे है उनको
काश शाम नही आती,दिनकर उजाला हि रहता कुछ तो आस जगी रहती,मन उदास नही होता। बीत गई बाते,कह कह कर निश्चित,सबका है जाना। फिर क्यो बन मन की पीड़ा,बार बार वही है दोहराना? क्या सच मानव कठपुतली बन यहां जीवन है जीता पूछ रहा राधा क घायल मन,वेणूमन भी है रीता। कृष्ण का विक्षिप्त तन-मन…
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Looking unto YOU
Wherefore o!lord,do you destine me? A moment of brightness then an eclipsed sea! Which way to go,do come once and tell me. Mind chooses one ,heart’s locked with another key. Direction is lost and thoughts waver abyss , Hours pass days run out,still stands this chase. Tasks are there,time’s short,spirit tides awhile How many breaths,do…
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“जय जय जय गुलाब जामुन “
नमन प्रसन्नचित्त होकर करती क्योंकर तुमको, कारण बहुत हैं,पर प्रमुख एक बताऊं सबको। चित् चंचल,व्यग्र हो तो हलवाई के घर जाओ, गर्म मीठे रस मे होली खेलते दुलारो को जो पाओ, आगे नही बढना ,”नन्हे गुलाबो “पर बस आंख टिकाओ। जैसे जैसे तैराकों की छवि,आंखों पर छायेगी, उनको देखने भर से,विपत्ति दूर हो जाएगी। आ!हा!हा!कितने…