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“क्यो कहूं?”
क्यों कहूं मै थक गई गति ही जब प्रकृति है। ठहरता नही कहीं रास्ता, चलना ही उसकी रूचि है। क्यों कहू अब मै हार गई श्रम ही श्रृष्टी की है प्रकृति। चलती रहती निरत हवा है, बाधा छोड बस दिशा बदलती! क्यो कहूं,मेरी आस छूट रही, जब श्वास डोर से है बंधी वहीं। पुनः पूर्व…
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आरती का जन्मदिन
ओम हमारी आरती को जन्मदिन की ढेरो बधाई। 🥰🥮🌻 एक छोटी सी ,बड़ी चंचल है हमारी गुडियाजिससे बंधी सबकी,अनेक खुशी की पुड़िया। सीधी न बंध पाती कभी जिसकी चोटी,स्कूल तक, उसकी शिकायत थी करती! पेट दर्द बहाना बना,अन्न छोड़ भाग जाती एक ही थाली में बैठ, इसलिये ही संग खाती। दूर कौआ दिखा,स्वादिष्ट हिस्सा उड़ा…
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“सीता का प्रश्न “
“दीपक की प्रज्वलित शिखा संग सगुण मुखरित यौवन ,मधुर कर रहा था दीपावली काअयोध्या में पुनरागमनलव -कुश को समर्पित प्रजा-पोषण राज सुरक्षा पालन।पूर्ण धरा धर्म स्थापन कर,शेष शैया विराजे थे नारायण । अनुकूल न थी श्वास, सिसक रहा जैसे नेपथ्य आवरणक्षुब्ध, बना था शेष शैया क्षीरसागर का शान्त वातावरणअप्रसन्न,अश्रुरंजित क्षीण ,मुदित न था अष्टलक्ष्मी मन।गम्भीर…
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सीता का प्रश्न
दीपक की प्रज्वलित शिखा का सगुण मुखरित यौवन , मधुर कर रहा था दीपावली काअयोध्या में पुनरागमन लव -कुश को समर्पित प्रजा-पोषण राज सुरक्षा पालन। पूर्ण धरा धर्म स्थापन कर,शेष शैया विराजे थे नारायण । अनुकूल न थी श्वास, सिसक रहा जैसे नेपथ्य आवरण क्षुब्ध, बना था शेष शैया क्षीरसागर का शान्त वातावरण अप्रसन्न,अश्रुरंजित क्षीण…
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Mind speaks out
Many a time, a restlessness commands A wish to speak out truthful feel wants, Without hesitation, uncontrolled tones ! Pour honestly, unscared, as sparkle rays of Sun Alike soldier fearlessly faces,shots of an aiming gun. That thinks not later nor remorses ever enclosed in freedom,regrets it never ! A bird with wings ,it flies higher…