• स्त्री का कौन अपना?

    “स्त्री का कौन अपना” यह प्रश्न बड़ा असहज है सबका। “भला कहो स्त्री का कौन है अपना?” लाइ जो जीवन को रोशनी के प्रांगण में। सींच कर सबके प्राण अपने तन मन से। दिया जिसने जगत को जागृत सपना। पूछ रहे वही, कहो स्त्री का कौन अपना? नहीं जरूर उसे किसी भी परिभाषा की। स्वयं…

  • मंजिल अभी दूर है

    मंच को नमन।मानसरोवर काव्य साहित्य मंचदिनांक-2 जुलाई 2026शीर्षक -मंजिल अभी दूर हैविधा -कविता “मंजिल अभी दूर है” कौन कहता है मुसाफिर, कि तुम्हारी मंजिल अभी दूर है। अगर हौसला बुलंद है हर कदम एक नई सहर है । देता है उजाला हिम्मत ,जैसे सूरज है नभ पर। खड़े ना रहो चौराहे पर, भटकाएगी तुम्हारे मन…

  • ” गौरैया रानी”

    छप्पक छैया छप्पक छैया !नहाने आई,सयानी गौरैया। पंख पसार वह डुबकी लेती। सहेलियों को भी पास बुलाती। चीं- चीं कर जाने क्या कहती।पानी पीकर वह उड़ जाती कहो सलोनी तुम क्या करती?बदली जब बूंदे हैं बरसाती! चिंता नहीं क्या तुमको घर की?बनाया नहीं क्यों अपनी मढ़ई? अनसुना कर, वह दाना चुगती।पंख फड़फड़ा कर, उड़ जाती।…………………………………

  • समय चक्र

    मंच को नमन।महिला काव्य मंच पश्चिम रांची झारखंडतारीख: 24. 6.26शीर्षक समय चक्रविधा-कविता “समय चक्र” सपनों संग लिपटा हमको, नाश कर गई नादानी। आवक बना समय -चक्र साथ ले गया जवानी। अब हालत है ऐसी, सूरत नहीं जाती पहचानी। समय- चक्र चर्चा बना रहा, सबकी ही परेशानी। इन्ही सपनों में बीत गई सबकी अबूझ जिंदगानी ।…

  • मां

    मंच को नमन। मानसरोवर साहित्य अकादमीतारीख १ २.५.२६विधा -कविताविषय -मांशीर्षक -“तुम्हारी यादें” मां,तुम सशरीर अब मेरे पास नहीं हो । लेकिन जीवन के हर पहलू में रहती हो। अपनी गूंजती बातों से याद दिलाती हो। प्रतिदिन मेरे हर काम में साथ रहती हो। ऐसा लगता है जैसे तुम यहीं कहीं हो। मेरे रुंधे मन को…

  • इंतजार

    मैंने बादलों को देखा।सब बोल रहे धेछोटे-छोटे गुट बनाकर। अलग-अलग दिशाओं में जाने कहां उड़ रहे थे।किसी की सोच शायद नहीं मिल नहीं रही थी।उन्न में से किसी को पता ही नहीं था । है और कब कितना बरसना है।मैंने पूछा उनसे” तुम सब क्या सोच रहे हो?एक होकर,थोड़ा हमारी और भी तो देखो!कितनी व्याकुलता…