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त तुम ही बताओ कृष्णा
क्यों ऐसा जग बनाया तुमने जिसमें रच बस दो ही सपना एक सुख का और दुख का अपना इतनी सुंदर कृति तुम्हारी रहते हो मनुष्य जन्म अनूपा सजा उसे तन मन धन से दे दिया उसे दुख का स्वरूप बने आदर्श स्वरूप राम तुम और बने राजा दधीचि क्यों अपने रूप में भी दुख का…
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“बेचैनी जब बढ़ जाए “
“बेचैनी जब बढ़ जाए “ बेचैनी जब बढ़ जाती मन व्याकुल सा होता है।किसी भी प्रयास से फिर शांत नहीं चित रहता है । वातावरण सारा जैसे आंधी की तरह धड़कता है ।बेचैनी जब बढ़ जाती है हर चीज प्रतिकूल सा लगता है ।सबकी मुस्कान में भी एक व्यंग सा भर जाता है ।किसी के…
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दान
दान कुछ रोज पहले ही मुझे मालूम हुआ की चित्रा फिर से अस्पताल में भर्ती है उसकी तबीयत ठीक नहीं। सिरोसिस ऑफ लिवर साधारण बीमारी नहीं होती लेकिन किसी का अंत भी इतना लंबा खींचे यह भी संभव नहीं किंतु चित्रा आज से कई वर्षों से इस तकलीफ को झेल रही थी तब चित्रा का…
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वह ठग ली गई
दिलीप उसके घर में एक किराएदार की तरह से रहा था तब उसका व्यवहार शीला को अच्छा लगता था ज्यादा बोलता ना था अपने काम से मतलब रखता प्रातः ही वह अपनी ड्यूटी पर निकल जाता और रात में देर से लौटता स्कूल की ड्यूटी करता था स्कूल के प्रिंसिपल की गाड़ी चलाता था स्कूल…
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72 का परिवर्तन
मालूम न था जिंदगी इस कदर हर पल बदलेगी । आस की चादर ओढ़ा, सपनों को तोड़ जाएगी ।। शायद सबकी जिंदगी में होता होगा कुछ ऐसा ही । मुझे तो पता नहीं यह परिवर्तन हो चाहे कुछ भी।। थके शरीर,इस पड़ाव पर नयी गृहस्थी बसाना। लगता यूं जैसे जिंदगी चाहती मुझे उलझाना।। एक कोटे…